Stock Market Crash
Stock Market Crash: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति का असर दुनिया के शेयर बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका की ओर से कई देशों से आने वाले आयातित सामान पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लागू किए जाने के बाद शुक्रवार को एशियाई बाजारों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. इसका असर सिर्फ जापान और दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत समेत कई बड़े बाजारों में भी निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.
एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट
शुक्रवार सुबह जैसे ही कारोबार शुरू हुआ, जापान का निक्केई इंडेक्स भारी दबाव में आ गया और इसमें 2,000 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. वहीं दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स भी लगभग 6 फीसदी टूट गया. हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा और करीब 2 फीसदी तक फिसल गया.
यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों पर भी इसका असर देखने को मिला. जर्मनी का DAX, फ्रांस का CAC और ब्रिटेन का FTSE-100 जैसे प्रमुख इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर हुआ है और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की भावना घट रही है.
भारत के लिए भी अच्छे संकेत नहीं
वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है. कारोबार शुरू होने से पहले भारतीय बाजार की दिशा बताने वाला Gift Nifty करीब 200 अंक नीचे कारोबार करता दिखाई दिया. आमतौर पर Gift Nifty में ऐसी गिरावट यह संकेत देती है कि घरेलू बाजार की शुरुआत भी दबाव में हो सकती है.
वैसे भी भारतीय शेयर बाजार पिछले चार कारोबारी सत्रों से लगातार गिरावट का सामना कर रहा है. पिछले कारोबारी दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 363 अंक टूटकर 76,391.39 के स्तर पर बंद हुआ था. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 127 अंक की कमजोरी के साथ 23,869.60 पर बंद हुआ. लगातार गिरते बाजार ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है.
ट्रंप के टैरिफ का क्या है मामला?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की सेक्शन 301 जांच के बाद अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है. यह फैसला 24 जुलाई से प्रभावी हो चुका है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उद्योगों और घरेलू कारोबार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है.
हालांकि, ऐसे फैसलों का असर अक्सर वैश्विक व्यापार और निवेश पर पड़ता है. निवेशकों को डर रहता है कि यदि बड़े देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी हो सकती है. यही वजह है कि बाजारों में अचानक बिकवाली बढ़ जाती है.
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आगे क्या देखेंगे निवेशक?
अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि वैश्विक व्यापारिक तनाव आगे कितना बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं. यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में जल्द सुधार नहीं होता, तो भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. ऐसे माहौल में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने और वैश्विक घटनाक्रम पर लगातार नजर रखने की सलाह दे रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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