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NEET पेपर लीक: डॉ. मनोज शिरूरे की जमानत खारिज, CBI बोली- ‘यह देश के खिलाफ अपराध’

NEET UG 2026 Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉ. मनोज शिरूरे की जमानत याचिका खारिज कर दी है. CBI के मुताबिक, इस पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने से सरकार को लगभग ₹600 करोड़ का नुकसान हुआ और लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ.

Rouse Avenue Court
Edited by Shubhra Rai

NEET UG 2026 Paper Leak: राऊज एवेन्यु कोर्ट से नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में आरोपी डॉ. मनोज शिरूरे को झटका लगा है. कोर्ट ने शिरूरे की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. स्पेशल सीबीआई जज अजय गुप्ता ने कहा आरोप काफी गंभीर है. अभी जांच चल रही है. लिहाजा इस समय जमानत देना संभव नहीं है.

क्या है मामला?

सीबीआई के अनुसार जांच में शिरूरे की अहम भूमिका सामने आई है. एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने आरोपी पी. वी. कुलकर्णी से केमेस्ट्री के प्रश्न हासिल कर तीन छात्रों तक पहुचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इन तीन छात्रों में एक आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज मोटेगांवकर का बेटा शामिल है. सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरूरे की कथित भूमिका केवल संपर्क तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने प्रश्नों को छात्रों तक पहुचाने की प्रक्रिया को सुगम बनाने में सक्रिय सहयोग किया.

अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी

मामले की गंभीरता और जांच के तथ्यों को देखते हुए अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. शिरूरे की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि शिरूरे का अपराध साधारण नहीं है, बल्कि देश के खिलाफ अपराध है, जिसने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है. इतना ही नहीं देश की साख पर भी इसका असर देखने को मिला है.

सरकार को 600 करोड़ रुपये का नुकसान

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे देशभर के छात्रों को भारी परेशानी हुई. सीबीआई के अनुसार इससे सरकार को 600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने यह भी बताया था कि पेपर लीक के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली है. सीबीआई का दावा है कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश का हिस्सा था और इसमें कई लोग शामिल थे. इतना ही नहीं लातूर में रेणुकाई केमेस्ट्री क्लासेज चलाने वाले शिवराज मोटेगांवकर ने अपने बेटे को कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में दाखिला दिलवाया था, जहां से उन्हें लीक किया गया प्रश्नपत्र मिला.

जांच एजेंसी का आरोप है कि,

मोटेगांवकर को ये सवाल पी. वी. कुलकर्णी से मिले थे. जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के उस पैनल का हिस्सा थे जिसने नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र तैयार किया था. सीबीआई ने शिवराज मोटेगांवकर की ओर से दायर जमानत याचिका पर कोर्ट द्वारा दाखिल जवाब में यह चौकाने वाला खुलासा किया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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