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उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर राज्य के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले से तैनात किसी भी शिक्षक को नौकरी से बाहर नहीं किया जाएगा.
नहीं जाएगी किसी की नौकरी
सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने जवाब में यूपी सरकार ने कहा कि साल 2020 में नियुक्त हुए 67 हजार 867 शिक्षकों की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और उनकी सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
इसके साथ ही सरकार ने यह भी रास्ता निकाला है कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक तैयार की जाने वाली संशोधित मेरिट लिस्ट में अगर नए उम्मीदवार पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें विभाग में उपलब्ध खाली पदों पर नियुक्ति दी जाएगी. यानी सरकार ने पुराने शिक्षकों को बचाते हुए नए अभ्यर्थियों के लिए भी दरवाजे खोलने की कोशिश की है.
‘इसे भविष्य के लिए मिसाल न माना जाए’: सरकार
अदालत में दिए हलफनामे में सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि यह विशेष व्यवस्था केवल इसी 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए लागू की जा रही है. इसे भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य भर्ती के लिए कानूनी मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.
हजारों शिक्षकों को राहत
योगी सरकार के इस रुख से 2020 से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के सिर से बर्खास्तगी की तलवार हट गई है, जिससे उनके परिवारों में राहत की सांस ली गई है. वहीं दूसरी तरफ, लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे उन अभ्यर्थियों में भी नई उम्मीद जगी है, जिनका नाम संशोधित मेरिट सूची में आ सकता है. अगर पद खाली रहते हैं, तो उन्हें जल्द ही नियुक्ति पत्र मिल सकेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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