Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

जिस शख्स ने कभी भारत देखा ही नहीं, उसने कैसे तय कर दी देश की तकदीर? जानें रेडक्लिफ लाइन की अनकही कहानी

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन आजादी के जश्न के ठीक दो दिन बाद सामने आई रेडक्लिफ रेखा ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी.

15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ तो सड़कों पर जश्न था, तिरंगा लहरा रहा था और सदियों की गुलामी के बाद लोग खुलकर सांस ले रहे थे. लेकिन इस आजादी की कहानी का एक बेहद दर्दनाक अध्याय अभी सामने आना बाकी था. आजादी के ठीक दो दिन बाद, 17 अगस्त को वह सीमा सार्वजनिक की गई, जिसे इतिहास में ‘रेडक्लिफ रेखा’ के नाम से जाना गया. इस एक फैसले ने लाखों लोगों की जिंदगी अचानक बदल दी.

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि भारत-पाकिस्तान की नई सीमा तय करने की जिम्मेदारी जिस व्यक्ति को दी गई थी, उसने इससे पहले भारत देखा तक नहीं था.

सर सिरिल रेडक्लिफ पेशे से ब्रिटिश बैरिस्टर थे. भारत आने से पहले उन्हें यहां की जमीन, समाज और स्थानीय परिस्थितियों का कोई प्रत्यक्ष अनुभव नहीं था. वे भारत की भाषाओं से परिचित नहीं थे और न ही भारतीय समाज की उस जटिल बनावट को करीब से जानते थे, जो सदियों में विकसित हुई थी.

इसके बावजूद उन्हें पंजाब और बंगाल की सीमा तय करने वाले आयोगों का अध्यक्ष बनाया गया. उनके सामने काम बेहद बड़ा था और समय बहुत कम. जुलाई 1947 में भारत पहुंचने के बाद उन्हें कुछ ही हफ्तों में यह तय करना था कि कौन सा इलाका भारत में जाएगा और कौन सा पाकिस्तान में.

कागज पर यह शायद सिर्फ एक सीमा थी, लेकिन जमीन पर इसका असर बहुत बड़ा था. पंजाब और बंगाल को बांटते हुए सीमा ने गांवों, खेतों, नहरों, सड़कों और रेलवे लाइनों तक को अलग कर दिया. कई इलाकों में लोगों को सुबह तक यह अंदाजा भी नहीं था कि जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से रह रहे हैं, वह अब किस देश का हिस्सा मानी जाएगी.

कहीं घर एक तरफ रह गया और खेत दूसरी तरफ. कहीं परिवारों के सदस्य अलग-अलग देशों में चले गए. जिन लोगों ने कभी अपने गांव से बाहर जाने की जरूरत नहीं समझी थी, उन्हें अचानक सब कुछ छोड़कर अनजान जगह की ओर निकलना पड़ा.

ब्रिटिश प्रशासन की दलील थी कि रेडक्लिफ का भारत से कोई पुराना जुड़ाव नहीं था, इसलिए वे निष्पक्ष रहेंगे. लेकिन आलोचकों के लिए यही बात सबसे बड़ी समस्या थी कि जिस व्यक्ति ने भारत को देखा ही नहीं, वह इतने कम समय में यहां की जमीन और लोगों की वास्तविकताओं को कितना समझ पाता?

सीमा का ऐलान आजादी के बाद क्यों हुआ?

रेडक्लिफ की रिपोर्ट अगस्त के मध्य तक तैयार हो चुकी थी, लेकिन सीमा का आधिकारिक ऐलान 17 अगस्त को किया गया. यानी भारत और पाकिस्तान के आजाद होने के बाद.

इसका एक बड़ा असर यह हुआ कि 15 अगस्त को जब लोग आजादी का जश्न मना रहे थे, तब उन्हें पूरी तरह पता नहीं था कि नई सीमा आखिर कहां से गुजरेगी. लेकिन जब फैसला सामने आया, तो हालात तेजी से बिगड़ने लगे.

पंजाब और बंगाल समेत कई इलाकों में लोगों ने अपना घर-बार छोड़ना शुरू कर दिया. हिंदू, सिख और मुसलमान—तीनों समुदायों के करोड़ों लोग इस उथल-पुथल से प्रभावित हुए. विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और लाखों लोगों की जान चली गई. विस्थापन का पैमाना इतना बड़ा था कि इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े जबरन पलायनों में गिना जाता है.

35 दिनों में तय हुई लाखों लोगों की किस्मत

रेडक्लिफ के सामने सबसे बड़ी मुश्किल समय की थी. उनके पास महीनों या वर्षों तक इलाके का अध्ययन करने का मौका नहीं था. उन्हें उपलब्ध जनगणना के आंकड़ों, नक्शों और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर बेहद जटिल फैसला लेना पड़ा.

बाद में रेडक्लिफ ने खुद माना कि काम के लिए दिया गया समय बेहद कम था. इतनी बड़ी और संवेदनशील सीमा को कुछ ही हफ्तों में तय करना अपने आप में असाधारण स्थिति थी. इस फैसले का असर केवल 1947 तक सीमित नहीं रहा. भारत और पाकिस्तान के बीच जो सीमा बनी, उसने आने वाले दशकों की राजनीति, रिश्तों और संघर्षों पर भी गहरी छाप छोड़ी.

विभाजन के बाद रेडक्लिफ इस पूरी त्रासदी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने काम के लिए मिलने वाला पूरा पारिश्रमिक लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने अपने कई कागजात नष्ट कर दिए और फिर कभी भारत नहीं लौटे.

रेडक्लिफ रेखा को सिर्फ नक्शे पर खींची गई एक सीमा मानना शायद इस पूरी कहानी को बहुत छोटा कर देना होगा. इसके पीछे लाखों परिवारों की टूटती जिंदगी, छूटते घर, बिछड़ते रिश्ते और हिंसा की अनगिनत कहानियां जुड़ी हैं.

यह भी पढ़ें: ‘दुनिया के किसी कोने में छिप जाओ, बचोगे नहीं!’ यूएई से पकड़े गए ड्रग माफिया बसोया की वापसी पर बोले अमित शाह

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital