रिपोर्ट- अभिषेक पांडे
मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने वाले लोगों के लिए मराठी भाषा सीखने को लेकर राज्य सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन सेवा से जुड़े चालकों को मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए. उनका कहना है कि इससे यात्रियों और चालकों के बीच बातचीत आसान होगी और रोजमर्रा की सेवा में भाषा को लेकर होने वाली दिक्कतें कम होंगी.
सरकार अब इस दिशा में एक विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी में है. इसके तहत परिवहन विभाग और फ्लाइंग स्क्वॉड की टीमें समय-समय पर ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच कर सकती हैं. अगर जांच के दौरान किसी चालक को मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं मिलता है, तो सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले उसे नोटिस दिया जाएगा.
परिवहन मंत्री के मुताबिक, सरकार की पहली कोशिश जागरूकता और प्रशिक्षण के जरिए चालकों को मराठी सिखाने की होगी. यानी जिन चालकों को भाषा नहीं आती, उन्हें तुरंत अपना रोजगार गंवाने की स्थिति में नहीं डाला जाएगा. उन्हें मराठी सीखने के लिए समय दिया जाएगा और इस दौरान सुधार का मौका मिलेगा.
हालांकि, नोटिस मिलने के बाद भी अगर कोई चालक मराठी सीखने की कोशिश नहीं करता या सरकार के निर्देशों की लगातार अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है. इसमें परमिट या लाइसेंस से जुड़े कदम भी शामिल हो सकते हैं.
रोजगार प्रभावित करना मकसद नहीं- सरनाईक
प्रताप सरनाईक ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी चालक की रोजी-रोटी पर चोट करना नहीं है. उनका जोर इस बात पर है कि महाराष्ट्र में काम करने वाले सार्वजनिक परिवहन के चालक स्थानीय भाषा को समझें और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर सकें.
मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में बाहर से आने वाले लोगों का स्वागत है, लेकिन राज्य में लंबे समय तक काम करने वालों से स्थानीय भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है. सरकार मराठी भाषा के संरक्षण और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.
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-भारत एक्सप्रेस
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