डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो बुधवार को समाप्त हो गई. फरलो की अवधि पूरी होते ही बुधवार शाम करीब 4:55 बजे उसे रोहतक स्थित सुनारिया जेल में वापस दाखिल करा दिया गया. राम रहीम को 25 अगस्त को 21 दिनों की फरलो मंजूर की गई थी. इस अवधि के दौरान वह हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुख्य आश्रम में रहा, जहां उसके अनुयायियों की भारी आवाजाही और गतिविधियां देखने को मिलीं.
गोपनीय रूट और कड़े सुरक्षा घेरे में वापसी
सिरसा आश्रम से रोहतक जेल तक की यात्रा के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आए. सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए राम रहीम की रवानगी का समय और उसका रूट पूरी तरह गोपनीय रखा गया था. किसी भी अप्रिय स्थिति, जाम या कानून-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए पुलिस के विशेष काफिले के साथ उसे सीधा सुनारिया जेल परिसर के भीतर ले जाया गया. जेल गेट पर कागजी और चिकित्सकीय औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उसे उसकी तय बैरक में भेज दिया गया.
वर्ष 2026 में तीसरी बार आया जेल से बाहर
साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार हत्याकांड में सजा काट रहे राम रहीम को जेल प्रशासन और सरकार की ओर से बार-बार मिलने वाली राहत लगातार चर्चा में रही है. वर्ष 2017 से सुनारिया जेल में बंद राम रहीम को अब तक कुल 17 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है. चालू वर्ष 2026 की बात करें, तो यह उसकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी. इससे पहले इसी वर्ष जनवरी माह में उसे 40 दिनों की पैरोल दी गई थी, जबकि मई के महीने में उसे 30 दिनों की पैरोल पर बाहर भेजा गया था.
दोहरे अपराध में काट रहा है उम्रकैद की सजा
गुरमीत राम रहीम को अगस्त 2017 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने अपनी दो शिष्याओं (साध्वियों) के साथ दुष्कर्म करने के मामले में 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. इसके बाद वर्ष 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. छत्रपति वही निर्भीक पत्रकार थे, जिन्होंने अपने अखबार ‘पूरा सच’ में डेरे के भीतर हो रहे यौन शोषण के मामलों को उजागर किया था. इन दोनों बड़े मामलों के कारण वह पिछले 9 वर्षों से सुनारिया जेल में सजा काट रहा है.
अकाल तख्त और छत्रपति परिवार ने दर्ज कराया विरोध
राम रहीम को समय-समय पर मिलने वाली पैरोल और फरलो पर विपक्षी दलों के साथ-साथ कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. इस बार भी उसकी फरलो का चौतरफा विरोध देखने को मिला. सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों से अपनी सजा पूरी कर चुके बंदी सिख कैदियों की रिहाई के मामले लंबित पड़े हैं, जबकि एक संगीन अपराधी को नियमों को ताक पर रखकर बार-बार राहत दी जा रही है.
वहीं, दिवंगत पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने भी विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बार-बार जेल से बाहर निकालने से न्याय प्रणाली पर सवाल उठते हैं और पीड़ित परिवारों में असुरक्षा व भय का माहौल पैदा होता है. विपक्ष का भी आरोप रहा है कि चुनाव या राजनीतिक लाभ के अवसरों पर नियमों में ढील देकर राम रहीम को बाहर भेजा जाता है.
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