नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर को दर्शाता दृश्य
PM Modi Political Journey: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 17 सितंबर को अपने जीवन के 76वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं. यह जन्मदिन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक पड़ाव लेकर आया है. बता दें 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार सत्ता की कमान संभालने से लेकर आज 2026 तक, नरेंद्र मोदी ने लगातार 25 वर्षों तक एक निर्वाचित सरकार के मुखिया के रूप में निर्बाध सेवा दी है.
बता दें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक साधारण प्रचारक और बीजेपी के कुशल रणनीतिकार से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के ‘प्रधान सेवक’ बनने का उनका यह सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है.
बीजेपी उनके इस 25 साल के ऐतिहासिक कार्यकाल को यादगार बनाने के लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में एक महीने का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चला रही है.
2001: जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट(PM Modi Political Journey)
नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा पहला मोड़ 7 अक्टूबर 2001 को आया. तब तक वे केवल बीजेपी के पर्दे के पीछे काम करने वाले कुशल संगठनात्मक नेता थे. लेकिन जनवरी 2001 में गुजरात में आए भीषण भूकंप के बाद उपजे राजनीतिक संकट के बीच उन्हें अचानक गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया.
बिना किसी प्रशासनिक अनुभव के, सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और आर्थिक पुनरुद्धार की जो नींव रखी, उसने आने वाले दो दशकों की राजनीति की दिशा तय कर दी.

2002 से 2012: ‘गुजरात मॉडल’ से राष्ट्रीय राजनीति की तरफ कदम
2002 के गोधरा कांड के बाद हुए चुनावों में बीजेपी को 182 में से 127 सीटें दिलाकर नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली चुनावी लहर दर्ज कराई. इसके बाद 2007 (117 सीटें) और 2012 (115 सीटें) में लगातार मिली जीत ने यह साबित कर दिया कि उनका जनाधार अटूट है. इस दौरान उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, 24/7 बिजली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर देकर ‘गुजरात मॉडल’ खड़ा किया. यही ‘गुजरात मॉडल’ आगे चलकर 2013 में उन्हें बीजेपी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का सबसे बड़ा आधार बना.
2014 से 2019: जन-धन से लेकर डिजिटल इंडिया का धमाका
2014 के आम चुनाव ने 30 साल बाद भारत में पूर्ण बहुमत वाली सरकार की वापसी कराई. 26 मई 2014 को शपथ लेने के बाद उन्होंने खुद को ‘प्रधानमंत्री’ नहीं बल्कि ‘प्रधान सेवक’ घोषित किया. पहले कार्यकाल (PM Modi Political Journey) में उन्होंने नीतिगत फैसलों के साथ-साथ सीधे जनता से जुड़ने वाली योजनाएं शुरू कीं – जैसे स्वच्छ भारत मिशन, जन धन योजना (जिसने करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खोले), उज्ज्वला योजना और ‘डिजिटल इंडिया’. 2019 में बीजेपी ने अपनी सीटें 282 से बढ़ाकर 303 कर लीं, जिससे मोदी का राजनीतिक प्रभाव भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया.

2019 से 2024: आपदा को अवसर में बदला
मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल (2019-2024) ऐतिहासिक फैसलों और प्रशासनिक इम्तिहानों के लिए जाना जाता है. अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना उनके वैचारिक एजेंडे की बड़ी जीत थी. वहीं 2020-21 में आई कोविड-19 महामारी के दौरान देशव्यापी वैक्सीनेशन ड्राइव (200 करोड़ से अधिक डोज), डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और ‘मुफ्त राशन योजना’ के जरिए उन्होंने देश को बड़े आर्थिक संकट से उबारा. इसी कार्यकाल में भारत ने G20 की अध्यक्षता कर अपनी कूटनीतिक धाक भी दुनिया में जमाई.
ये भी पढ़ें- मक्का हमले के नाम पर नया दांव? अब्राहम डील में शामिल होने की पटकथा तैयार?
2024 में लगाई जीत की हैट्रिक
जून 2024 में 9 जून को नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार (PM Modi Political Journey) भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार आम चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने वाले वे देश के दूसरे नेता बने. गठबंधन सरकार (NDA) के साथ तीसरे कार्यकाल में कदम रखते हुए पीएम मोदी का पूरा ध्यान अब ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर टिका है.
साथ ही सेमीकंडक्टर मिशन, मेक इन इंडिया 2.0, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर (वंदे भारत, एक्सप्रेसवे) और ग्रीन एनर्जी के बल पर वे 2026 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





