कांग्रेस नेताओं के विवादित बयान
Congress Controversial Statements: राजनीति में जुबान फिसलना या फिर किसी मुद्दे पर दिए गए बयानों का तूल पकड़ना कोई नई बात नहीं है. आए दिन राजनेताओं के ऐसे बयान सामने आ जाते हैं जो चर्चा का विषय बन जाते हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर अनुप्रीत सिंह नाम के शख्स के हैंडल से पोस्ट की गई एक वीडियो सामने आई है, जिसमें कांग्रेस पार्टी के नेताओं के कुछ ऐसे ही सिलसिलेवार बयानों को उजागर किया गया है.
इन बयानों ने न सिर्फ राजनीतिक पारा गर्म किया बल्कि आम जनता के मन में यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि आखिर पार्टी ऐसी सोच को बढ़ावा क्यों दे रही है. यही वो तमाम वजहें हैं जिनकी वजह से आम आदमी या देश का एक बड़ा वर्ग कांग्रेस पार्टी से परेशान आ चुका है और उसे नापसंद करने लगा है.
उमर खालिद को बताया ‘नेशनलिस्ट’
शुरुआत करते हैं कर्नाटक से, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी.के. हरिप्रसाद ने एक बयान देते हुए जेएनयू के पूर्व छात्र और जेल में बंद उमर खालिद को ‘राष्ट्रवादी’ यानी नेशनलिस्ट करार दे दिया. अनुप्रीत सिंह की उस वायरल वीडियो में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ऐसे बयानों के सामने आते ही समझ आ जाता है कि पार्टी के नेताओं की प्राथमिकताएं कहां हैं.
विरोधी पार्टियों ने तो इस पर हमला बोला ही, लेकिन आम जनता के बीच भी यह संदेश गया कि देश विरोधी गतिविधियों में फंसे लोगों को महिमामंडित करना कांग्रेस की फितरत बन चुकी है. और शायद यही वो रवैया है जो लोगों को कांग्रेस के खिलाफ खड़ा कर देता है.
भगत सिंह पर शर्मनाक तुलना
इसके अलावा, हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का एक बयान भी लोगों के गुस्से की बड़ी वजह बना. सोशल मीडिया पर शेयर की गई वीडियो के मुताबिक एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान जब उन्होंने हमास जैसे खतरनाक संगठन और अमर शहीद भगत सिंह को एक ही तराजू में तौलने की कोशिश की तो हर देशभक्त का खून खौल उठा.
सिख समुदाय समेत देश के हर कोने में इस तुलना पर कड़ी आपत्ति जताई गई. जब देश के सबसे बड़े क्रांतिकारियों का अपमान इस तरह से किया जाए, तो साफ पता चलता है कि पार्टी के नेताओं को अपनी ऐतिहासिक धरोहर और भावनाओं की कितनी परवाह है.
हरक सिंह रावत की ’12 बजने’ वाली टिप्पणी
इसी के साथ उत्तराखंड के मामले को ही ले लीजिए, जहां सोशल मीडिया यूजर अनुप्रीत सिंह के वीडियो में उठाए गए मुद्दों के अनुसार कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सिखों से जुड़ी एक काफी संवेदनशील कहावत का इस्तेमाल कर दिया.
हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांग ली, लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे शब्द नेताओं के मुंह पर आते ही क्यों हैं? किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना और फिर मामूली माफी मांगकर बच निकलना कांग्रेस नेताओं की पुरानी आदत बन चुकी है.
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1984 के दंगों के आरोपी के निधन पर उमड़ा ‘प्रेम’
हद तो तब पार हो गई जब 1984 के सिख विरोधी दंगों और नरसंहार के मुख्य आरोपियों में शामिल सज्जन कुमार के निधन के बाद कांग्रेस खेमे से संवेदनाएं उमड़ने लगीं. वीडियो में इस बात का भी जिक्र है कि कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा की तरफ से इस मामले में जो रुख देखा गया उसने सिख समुदाय और देश के तमाम इंसाफ पसंद लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया.
दंगों के इतने गंभीर मामलों से जुड़े व्यक्ति के लिए ऐसी हमदर्दी दिखाना साफ दिखाता है कि पार्टी वोटबैंक की राजनीति के आगे इंसानी संवेदनाएं और न्याय भूल चुकी है.
अब शायद ऐसे ही और भी कई कारण हैं जिनकी वजह से आम जनता का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है और लोग खुलकर कहते हैं, “यही वजह है कि मैं कांग्रेस से नफरत करता हूं.” जब देशहित, शहीदों के सम्मान और एकता से ऊपर पार्टी की राजनीति को रखा जाएगा तो शायद जनता ऐसी सोच को कभी अपना नहीं पाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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