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संतान सप्तमी व्रत कथा: संतान की सुख-समृद्धि के लिए करें शिव-पार्वती की पूजा, पढ़ें पूरी पौराणिक कथा

Santan Saptami Vrat Katha: संतान सप्तमी का व्रत संतान के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना शुभ माना जाता है.

 Santan Saptami Vrat Katha

 Santan Saptami Vrat Katha- bharat express

 Santan Saptami Vrat Katha: संतान सप्तमी का व्रत संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने तथा व्रत कथा का पाठ करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. माताएं विशेष रूप से संतान के कल्याण के लिए यह व्रत करती हैं.

संतान सप्तमी व्रत की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय अयोध्या के राजा नहुष और उनकी पत्नी चंद्रमुखी भगवान शिव और माता पार्वती के भक्त थे. एक दिन दोनों नर्मदा नदी के तट पर गए. वहां उनकी मुलाकात एक तपस्वी से हुई. उसी समय राजा की पत्नी चंद्रमुखी ने अपनी सहेली के साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा की और संतान के सुख की कामना की. कहा जाता है कि पूजा के दौरान चंद्रमुखी से कुछ भूल हो गई. इसके कारण उन्हें अगले जन्म में कष्टों का सामना करना पड़ा. बाद में भगवान शिव की कृपा से उन्हें अपने पूर्व जन्म की बातों का स्मरण हुआ. उन्होंने विधि-विधान से संतान सप्तमी का व्रत किया और भगवान शिव तथा माता पार्वती की आराधना की.

व्रत के प्रभाव से मिला संतान सुख

धार्मिक मान्यता के अनुसार, संतान सप्तमी का व्रत करने से चंद्रमुखी के जीवन में सुख-समृद्धि आई और उन्हें संतान का सुख प्राप्त हुआ. तभी से यह व्रत संतान की मंगलकामना से किए जाने की परंपरा मानी जाती है. इस कथा से यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

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ऐसे करें संतान सप्तमी की पूजा

इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें. भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करें. दीपक जलाकर फल, फूल, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद संतान सप्तमी व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ या श्रवण करें. पूजा के अंत में संतान के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना करें. व्रत और पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है.

भारत एक्सप्रेस



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