पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के साथ एक बेहद प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया है. इस श्लोक के जरिए उन्होंने जीवन में आत्मनिर्भरता के महत्व के साथ-साथ दूसरों की सेवा करने की भावना पर विशेष जोर दिया है. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस सुभाषित को पोस्ट करते हुए इसके गहरे अर्थ को रेखांकित किया है.
क्या है इस संस्कृत श्लोक का अर्थ?
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है:
“स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया।
सत्पुंसो मरुभूरिव जीवनमात्रं समाशास्यम्॥”
स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया।
सत्पुंसो मरुभूरिव जीवनमात्रं समाशास्यम्॥ pic.twitter.com/KTlxVofSBs
— Narendra Modi (@narendramodi) September 18, 2026
इस सुंदर और गहरे संदेश वाले श्लोक का मुख्य सार यह है कि व्यक्ति की सच्ची समृद्धि और संपन्नता हमेशा उसकी आत्मनिर्भरता में ही निहित होती है. इसके अलावा, जीवन की सबसे बड़ी ऊंचाई इस बात में है कि इंसान दूसरों के लिए जीवन का आधार और उनके संबल का साधन बने.
उदाहरण से समझाई परोपकार की सीख
इस सुभाषित के माध्यम से यह भी समझाया गया है कि एक सच्चे और परोपकारी मनुष्य का जीवन उस मरुभूमि (रेत के विस्तार) की तरह होना चाहिए, जो खुद भले ही कठिन परिस्थितियों में हो, लेकिन अपनी छांव और जीवनोपयोगी स्वरूप से दूसरों को सहारा दे सके.
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