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ममता के घास-फूल फ्रीज: दोफाड़ TMC को चुनाव आयोग ने दिए नए नाम और सिंबल, किसे क्या मिला?

EC On TMC New Party Row: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस टीएमसी (TMC) के अंदरूनी घमासान और सिंबल विवाद पर चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला सुना दिया है. जानिए ममता गुट और बागी रितब्रत बनर्जी गुट को क्या नाम और सिंबल मिले हैं?

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EC On TMC New Party Row: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे सियासी घमासान और दोफाड़ के बाद चुनाव आयोग (EC) ने एक बड़ा और कड़ा अंतरिम फैसला सुनाया है. आयोग ने पार्टी के पुराने ‘दो फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह और मूल नाम को फ्रीज करने के बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नई पहचान दे दी है. आगामी पश्चिम बंगाल और असम के उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि उम्मीदवारों के नामांकन और पहचान को लेकर कोई असमंजस न रहे.

आयोग के इस अंतरिम आदेश के मुताबिक, दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना जाएगा. यह अभी पश्चिम बंगाल में हो रहे उपचुनाव के लिए भी लागू होंगे.

किसे क्या मिला? (Election Commission TMC Decision)

ममता बनर्जी गुट: चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ (AITMC) नाम दिया है. इस गुट के लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ (Football Player) चुनाव चिन्ह तय किया गया है.

रितब्रत बनर्जी (अरूप रॉय) गुट: बागी नेता रितब्रत बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम दिया गया है, और इन्हें ‘लिफाफा’ (Envelope) चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है.

नामांकन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं (TMC Symbol Row)

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों ने पहले ही अजरूप रॉय गुट के ‘Form-B’ के आधार पर नामांकन दाखिल कर दिया था, उन्हें अब ‘Democratic Trinamool Congress’ का उम्मीदवार माना जाएगा और उनके लिए ‘लिफाफा’ चिन्ह रहेगा. वहीं, ममता गुट के फॉर्म के आधार पर दाखिल नामांकन वाले उम्मीदवार ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे.

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इस पूरे घटनाक्रम पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी वोट लूटने के बाद अब पार्टियां तोड़ रही है और यह सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर निष्पक्ष वोटर की लड़ाई है. दूसरी ओर, टीएमसी खेमे में भी इस अंतरिम फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. अब सभी की निगाहें 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर के अहम उपचुनावों पर टिकी हैं.



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