Pakistan Kohat Attack: ‘दूसरों के घर में आग लगाने की कोशिश करने वाले अक्सर भूल जाते हैं कि हवा का रुख बदलते ही उनका अपना घर भी जल सकता है.’ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट में हुआ ताजा आतंकी हमला इस बात का सबसे बड़ा सबूत है. दशकों तक आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें अपनी सरपरस्ती में पालने वाला पाकिस्तान आज उसी आतंकवाद के नासूर का शिकार हो रहा है.
शुक्रवार को कोहाट की पुरानी पुलिस लाइन्स मस्जिद के पास हुए दोहरे आतंकी हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान का ‘गुड तालिबान और बैड तालिबान’ का खेल अब उसी पर भारी पड़ रहा है.
मस्जिद में बारूद और गोलियों की तड़तड़ाहट
जुमे की नमाज के वक्त जब लोग इबादत में मशगूल थे, तभी आतंकियों ने विस्फोटक से भरी गाड़ी को मस्जिद के करीब उड़ा दिया. इसके बाद हथियारों से लैस आतंकी स्पेशल ब्रांच की इमारत में घुस गए. लगभग 19 घंटे तक चले चले इस खौफनाक क्लियरेंस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 8 आतंकियों को ढेर तो कर दिया, लेकिन तब तक 17 पुलिसकर्मियों और 6 नागरिकों समेत 23 लोगों की जान जा चुकी थी. इस हमले में 100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं.
अपनों के ही खून का प्यासा हुआ TTP
इस नृशंस हमले की जिम्मेदारी हाफिज गुल बहादुर के नेतृत्व वाले ‘इत्तेहादुल मुजाहिदीन’ ने ली है, जिसका सीधा संबंध प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से है. यह वही गुट है जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां कभी अपनी ‘रणनीतिक बढ़त’ मानती थीं.
ऑपरेशन के दौरान सीटीडी (CTD) के एडिशनल आईजी के हाथ में ग्रेनेड का छर्रा लगने से घायल हो गए. वहीं, हमले में ट्रैफिक एसपी अकबर शिनवारी और अस्पताल के बाल रोग प्रमुख डॉ. इसराइल जैसे बड़े चेहरों की मौत हो गई.
बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय?
वर्ष 2010 में भी इसी कोहाट पुलिस लाइन्स के पीछे हुए धमाके में 20 लोग मारे गए थे. दशकों से अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए करने वाले पाकिस्तान को अब समझ नहीं आ रहा कि वह अपने ही पाले हुए इन चरमपंथी गुटों से कैसे निपटे. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की नर्सरी को जड़ से खत्म नहीं करेगा, तब तक ऐसे क्लियरेंस ऑपरेशन केवल तबाही की गिनती ही बढ़ाते रहेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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