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दिल्ली की तमाम जिला अदालतों में सोमवार, 21 सितंबर को वकीलों ने एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है. संशोधित मोटर व्हीकल नियमों के तहत ट्रैफिक चालान के निपटारे का अधिकार एसडीएम (SDM), एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे जाने के फैसले से वकील सख्त नाराज हैं.
इस विरोध के चलते आज जिला अदालतों में वकील न तो खुद पेश होंगे और न ही वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में भाग लेंगे. इसके अलावा, सुबह 11:30 बजे अदालत परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किया जाएगा.
नियमों पर क्यों भड़के वकील?
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 167 में हुए संशोधन और दिल्ली सरकार के चालान निपटारे के नए नियमों को बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने आम जनता के खिलाफ बताया है. नए नियम के मुताबिक, चालान कटने के 45 दिनों के भीतर व्यक्ति को या तो जुर्माना भरना होगा या फिर पोर्टल पर सबूतों के साथ उसे चुनौती देनी होगी.
सबसे ज्यादा आपत्ति उस शर्त पर जताई जा रही है, जिसके तहत यदि नामित अधिकारी व्यक्ति की चुनौती खारिज कर देता है और वह मामला अदालत ले जाना चाहता है, तो उसे पहले चालान की आधी राशि यानी 50 फीसदी रकम जमा करनी होगी. वकीलों का कहना है कि यह शर्त नागरिकों के न्याय पाने के बुनियादी अधिकार पर हमला है.
आश्वासन के बाद भी अधिसूचना जारी करने का आरोप
समन्वय समिति के महासचिव नरवीर डबास और सेंट्रल दिल्ली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज कुमार के अनुसार, इस प्रस्ताव को लेकर 27 अगस्त 2026 और 7 सितंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री व कानून मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया था. बैठकों में आश्वासन दिया गया था कि जब तक इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने नहीं उठाया जाता, तब तक इसे लागू नहीं किया जाएगा.
हालांकि, मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि तहसीलदारों, फूड एंड सप्लाई अफसरों और परिवहन अधिकारियों को चालान निपटाने के अधिकार दे दिए गए हैं. इसी वादाखिलाफी से आहत होकर वकीलों ने सड़कों पर उतरने और हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है.
-भारत एक्सप्रेस
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