No UPI Day In Indore And Bhopal: केंद्र सरकार द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश के व्यापारी लामबंद हो गए हैं. डिजिटल पेमेंट के इस नए नियम के विरोध में भोपाल और इंदौर के कारोबारी संगठनों ने सीधे मोर्चा खोलते हुए 23 सितंबर को ‘No UPI Day’ मनाने का ऐलान किया है.
इस दिन दोनों प्रमुख शहरों में थोक और फुटकर व्यापारी ऑनलाइन पेमेंट लेने से पूरी तरह परहेज करेंगे और सिर्फ नकद में ही कारोबार कर सरकार के खिलाफ अपना सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे.
इंदौर में आंदोलन की चेतावनी (Indore Protest UPI MDR)
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में विरोध की रणनीति तैयार हो चुकी है. देवी अहिल्या चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के आह्वान पर शहर भर के व्यापारी 23 सितंबर को यूपीआई के जरिए कोई भी भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे. व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने इस शुल्क को वापस नहीं लिया, तो 23 सितंबर के सांकेतिक विरोध के बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
सियागंज होलसेल व्यापारी संघ के उपाध्यक्ष नईम पालवाला का कहना है कि 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर मर्चेंट पर लगने वाले चार्ज का सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा. व्यापारी घाटे से बचने के लिए इसे अंततः सामान की कीमतों में जोड़ेंगे, जिससे सीधे तौर पर आम ग्राहक प्रभावित होगा और बाजार में महंगाई बढ़ेगी.
भोपाल में व्यापारिक संगठन एकजुट (No UPI Day In Bhopal)
राजधानी भोपाल में भी इस फैसले को लेकर व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव अनुपम अग्रवाल ने कहा कि सरकार के कहने पर ही कारोबारियों ने नकद छोड़कर डिजिटल पेमेंट को अपनाया था. अब जब व्यापार पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था पर निर्भर हो चुका है, तब अतिरिक्त शुल्क थोप दिया गया है.
ये भी पढ़ें: 6 साल तक फ्री रहा UPI, अब क्यों वसूला जाएगा पैसा? आखिर क्यों सरकार ने खत्म की जीरो MDR नीति?
व्यापारियों का कहना है कि थोक और कई फुटकर सेक्टरों में मार्जिन बहुत सीमित होता है. ऐसे में मुनाफे से अधिक पैसा एमडीआर शुल्क में चला जाएगा, जिससे व्यापार घाटे का सौदा बन जाएगा. इसलिए अब व्यापारी घाटे से बचने के लिए दोबारा नकद लेनदेन को प्राथमिकता देने को मजबूर हैं. भोपाल के 100 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने मिलकर इस शुल्क का विरोध किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


