सिकंदराबाद के प्रतिष्ठित एमसीईएमई (MCEME) प्रेक्षागृह में ‘राष्ट्रीय सैनिक संस्था’ द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत 2047’ संगोष्ठी में अहिंसा विश्व भारती व विश्व शांति केंद्र के संस्थापक और प्रसिद्ध विश्व शांति दूत जैन आचार्य लोकेश जी के ओजस्वी विचारों की गूंज रही. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए आचार्य लोकेश जी ने स्पष्ट किया कि 2047 का विकसित भारत केवल आर्थिक आंकड़ों और भौतिक उन्नति से तय नहीं होगा बल्कि इसके लिए नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों का सुदृढ़ होना सबसे ज्यादा जरूरी है.
इस गरिमामयी समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल श्री शिव प्रकाश शुक्ल और देश की नामचीन सैन्य व नागरिक हस्तियां भी मौजूद रहीं.
आचार्य लोकेश जी का राष्ट्र निर्माण का विजन
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आचार्य लोकेश जी ने युवाओं और समाज के हर वर्ग से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” सिर्फ एक आर्थिक या बजटीय लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह भारत को फिर से उसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव के शिखर पर स्थापित करने का महा-संकल्प है. आचार्य जी ने जोर देकर कहा कि जब तक भौतिक प्रगति के साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तब तक किसी भी समाज का विकास अधूरा ही रहेगा.
सनातन परंपरा के मूल्य ही विकसित भारत की वैचारिक नींव
विश्व शांति दूत आचार्य लोकेश जी ने भारत की प्राचीन सनातन और श्रमण संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा, करुणा, सत्य, मैत्री और सह-अस्तित्व ही भारत की असली पहचान हैं. यही मूल्य विकसित भारत की सबसे मजबूत वैचारिक नींव साबित होंगे. उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया युद्ध, हिंसा और मानसिक तनाव से जूझ रही है, तब भारत का शांति और अहिंसा का विचार ही विश्व को सही दिशा दिखा सकता है.
आचार्य जी ने दिया तरक्की का फॉर्मूला
राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए आचार्य लोकेश जी ने एक अनूठा और क्रांतिकारी फॉर्मूला पेश किया. उन्होंने कहा:
जब देश के युवाओं की असीम ऊर्जा, हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों का कठोर अनुशासन, वैज्ञानिकों की प्रतिभा और उद्यमियों का नवाचार (Innovation) एक साथ मिलेगा, तभी 2047 का स्वर्णिम और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा.
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल देश के सकारात्मक निर्माण में लगाएं.
तेलंगाना के राज्यपाल समेत अन्य दिग्गज भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में मौजूद तेलंगाना के माननीय राज्यपाल श्री शिव प्रकाश शुक्ल ने भी आचार्य लोकेश जी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन में छिपी है. संगोष्ठी के दौरान राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी, मेजर जनरल एन. श्रीनिवासा राव, एम.डी.के. अवस्थी, लेफ्टिनेंट जनरल नीरज वार्ष्णेय, एयर मार्शल राहुल भसीन और लाइफ स्पैन इंडस्ट्रीज के सीईओ नरेंद्र राम नंबुल्ला समेत कई शीर्ष दिग्गजों ने आचार्य लोकेश जी के मार्गदर्शन की सराहना की.
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2047 में विश्व गुरु बनने की ओर भारत का शंखनाद
आचार्य लोकेश जी के प्रेरणादायी संबोधन ने कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों युवाओं, सैनिकों और बुद्धिजीवियों में नया जोश भर दिया. संगोष्ठी का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि राष्ट्रीय हित, अनुशासन, सकारात्मक सोच और मूल्य-आधारित विकास के रास्ते पर चलते हुए भारत 2047 तक न केवल एक विकसित राष्ट्र बनेगा, बल्कि पूरे विश्व को शांति और सौहार्द का मार्ग दिखाने वाला सच्चा ‘विश्व गुरु’ भी बनेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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