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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT ने कोर्ट में दाखिल की 7,000 पन्नों की चार्जशीट, 173 गवाह और 105 घटनाएं उजागर; चंपत राय भी बने गवाह

RAM MANDIR CHARGESHEET FILED: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अदालत में करीब सात हजार पन्नों की विशाल चार्जशीट दाखिल कर दी है. चार्जशीट में काउंटिंग रूम से चोरी की 105 घटनाओं का ब्योरा, 173 गवाहों के बयान और ₹79.85 लाख नकद की बरामदगी दर्ज है. वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बल्कि सरकारी गवाह बनाया गया है.

Champat Rai Resigns Former IFS Krishna Mohan Takes Charge Of Ram Mandir Trust

Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर के काउंटिंग रूम से चढ़ावा राशि और मूल्यवान सामग्री चोरी होने के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने बुधवार को स्थानीय अदालत में करीब सात हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी. एसआईटी की इस व्यापक जांच में कुल 173 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं, जबकि मंदिर के सीसीटीवी फुटेज के गहन तकनीकी विश्लेषण के आधार पर कथित चोरी की 105 अलग-अलग घटनाओं की पहचान की गई है.

चंपत राय और अनिल मिश्रा नहीं हैं आरोपी, देंगे गवाही

दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को मामले में अभियुक्त नहीं बनाया गया है. एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में दोनों प्रमुख पदाधिकारी गवाह के रूप में सामने आए हैं. इनके अतिरिक्त गोपाल राव और कृष्ण मोहन को भी अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया गया है और ये सभी अदालत में अपने बयान दर्ज कराएंगे.

चार्जशीट दाखिल होने पर वकीलों का कड़ा विरोध

बुधवार को चार्जशीट पेश किए जाने के बाद अयोध्या कोर्ट परिसर में गहमागहमी और विवाद की स्थिति बन गई. स्थानीय अधिवक्ताओं के एक समूह ने चार्जशीट को लेकर अदालत के संज्ञान लेने से पहले अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की मांग उठाई. वकीलों ने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को आरोपी न बनाए जाने को लेकर असंतोष व्यक्त किया और पूरी चार्जशीट देखने की मांग की. बाद में जिला जज के साथ वार्ता और समझाइश के उपरांत वकीलों ने न्यायिक कार्य दोबारा शुरू किया.

सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक ऑडिट और नकदी बरामदगी

चार्जशीट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने दानपात्र से नकदी गिनने वाले काउंटिंग रूम के महीनों के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली. फुटेज में कर्मियों द्वारा कथित तौर पर नकदी निकालने या छिपाने की 105 वारदातों की कड़ियां जोड़ी गईं. जांच को पुख्ता करने के लिए फॉरेंसिक ऑडिट, वित्तीय ऑडिट और बैंक खातों के ब्योरे को साक्ष्य बनाया गया है.

चार्जशीट में आरोपियों के कब्जे से 79.85 लाख रुपये की नकदी, वाहन और सोने-चांदी के आभूषणों की विधिवत बरामदगी का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है.

समयसीमा खत्म होने से पहले एसआईटी का एक्शन

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया था कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और निर्धारित 90 दिनों की वैधानिक मियाद पूरी होने (25 सितंबर) से पहले अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी. सरकार ने समयसीमा से दो दिन पहले ही प्रक्रिया पूरी कर अदालत में आरोप पत्र पेश कर दिया.

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