लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की राजनीति में आम तौर पर दिखने वाली सत्ता विरोधी लहर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के खिलाफ तो नजर आती है, लेकिन भाजपा के मामले में यह प्रभाव दिखाई नहीं देता. राहुल गांधी ने इसी आधार पर 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने का दावा किया.
राहुल गांधी ने कहा कि वे एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और करीब पांच दशकों से भारतीय राजनीति को बहुत करीब से देखते रहे हैं. उनके मुताबिक, लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली किसी भी सरकार के खिलाफ समय के साथ एंटी-इन्कम्बेंसी यानी सत्ता विरोधी माहौल बनना स्वाभाविक है.
उन्होंने अपने तर्क को समझाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण भी दिया. राहुल गांधी के मुताबिक, बांग्लादेश युद्ध के बाद इंदिरा गांधी की लोकप्रियता काफी बढ़ी थी, लेकिन कुछ समय बाद उनके खिलाफ भी सत्ता विरोधी भावना पैदा हुई. उनका कहना था कि इसी तरह कांग्रेस और अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के नेताओं को भी चुनावों में एंटी-इन्कम्बेंसी का सामना करना पड़ता है. हालांकि, उनके अनुसार भाजपा के मामले में तस्वीर अलग दिखाई देती है.
‘मेरे पास पर्याप्त सबूत हैं’
राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इन चुनावों में धांधली हुई है और उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह महज 99 प्रतिशत का भरोसा नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत निश्चितता का मामला है.
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए ये दावे राहुल गांधी के आरोप हैं. चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए ऐसे आरोपों पर संबंधित संस्थाओं की ओर से दिए गए जवाब और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे.
मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी निशाना
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी अपने निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से की गई थी.
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए. राहुल गांधी का दावा है कि चुनाव आयुक्तों के बीच भी इस प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं और उन्होंने मौजूदा स्थिति के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को जिम्मेदार ठहराने की बात कही.
वोट की सुरक्षा को बताया लोकतंत्र की बुनियाद
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग की सबसे अहम जिम्मेदारी देश के मतदाताओं के वोट की रक्षा करना है. उनके मुताबिक, अगर मतदाता का वोट सुरक्षित नहीं रहता तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है.
उन्होंने तर्क दिया कि वोट की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से संविधान के कामकाज, कानूनों की वैधता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं.
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को एक राजनीतिक टिप्पणी के जरिए संक्षेप में रखते हुए कहा कि पहले ‘वोट चोरी’ हुई, उसके बाद ‘कानून चोरी’ हुआ और अब संस्थाओं की ‘चोरी’ हो रही है. उन्होंने आगे दावा किया कि अगर किसी सांसद का चुनाव कथित तौर पर वोट में गड़बड़ी के जरिए हुआ है, तो उसके द्वारा बनाए गए कानूनों की वैधता पर भी सवाल उठना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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