भारत से सैकड़ों किलोमीटर दूर ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में बिछाई गई एक रेल पटरी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीति (Geopolitics) की पूरी दिशा बदलने जा रही है. ईरान ने चाबहार से जहेदान (Chabahar-Zahedan Railway Line) तक रेलवे ट्रैक बिछाने का काम आधिकारिक रूप से पूरा कर लिया है. ईरान की सड़क एवं शहरी विकास मंत्री फरजानेह सादेघ ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की पुष्टि करते हुए इसे समूचे मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के लिए आर्थिक क्रांति का वाहक बताया है.
देखने में यह ईरान के भीतर एक घरेलू रेल परियोजना है, लेकिन इसके मायने भारत के रणनीतिक और व्यापारिक हितों से जुड़े हैं.
भारत-ईरान चाबहार और जहेदान का भौगोलिक महत्व
भौगोलिक दृष्टि से चाबहार ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर ओमान की खाड़ी में स्थित एक गहरा और रणनीतिक बंदरगाह है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ईरान का एकमात्र ऐसा पोर्ट है जो संकीर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बाहर सीधे खुले हिंद महासागर से जुड़ा हुआ है.
वहीं जहेदान, इसी प्रांत की प्रांतीय राजधानी है जो ईरान के भीतरी हिस्से में अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा के बिल्कुल नजदीक स्थित है.
परियोजना का आकार: मुख्य रेल लाइन लगभग 630 किलोमीटर लंबी है, जबकि लूप और शाखा लाइनों को मिलाकर कुल लंबाई करीब 735 किलोमीटर हो जाती है.
इंजीनियरिंग चमत्कार: इसमें 39 रेल सुरंगें (कुल 17 किमी लंबाई), 33 आधुनिक स्टेशन, 201 से अधिक पुल और 2,000 से ज्यादा ड्रेनेज प्रणालियां शामिल हैं.
क्षमता: पूरी तरह चालू होने के बाद इस ट्रैक से सालाना करीब 77 लाख टन माल ढुलाई और 22 लाख यात्रियों के आवागमन का अनुमान है.
भारत के लिए क्यों गेमचेंजर है यह रेल मार्ग?
1. पाकिस्तान को पूरी तरह बायपास करने का विकल्प
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने तनाव के चलते पाकिस्तान ने भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए जमीनी ट्रांजिट रूट देने से हमेशा इनकार किया है. चाबहार-जहेदान रेल लाइन भारत के मुंबई या कांडला पोर्ट से सीधे माल को समुद्र के जरिए चाबहार उतारने और वहां से ट्रेन के जरिए सीधे अफगानिस्तान की सीमा तक पहुंचाने की सुविधा देती है. भारत अब पाकिस्तान के रहमो-करम पर निर्भर नहीं रहेगा.
2. मध्य एशिया के 5 ‘लैंडलॉक्ड’ देशों का समुद्री द्वार
मध्य एशिया के पांचों प्रमुख देश— कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान पूरी तरह ‘लैंडलॉक्ड’ (जमीनी सीमाओं से घिरे) हैं और उनके पास खुले समुद्र तक कोई सीधी पहुंच नहीं है. भारत अपने भारी इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाइयां, कृषि उत्पाद और आईटी उपकरण सीधे इन देशों तक पहुंचा सकेगा और बदले में वहां से यूरेनियम, कच्चा तेल और दुर्लभ खनिज मंगा सकेगा.

3. INSTC (इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर)
भारत, रूस और ईरान ने 7,200 किलोमीटर लंबे मल्टी-मॉडल कॉरिडोर (INSTC) की परिकल्पना की थी. चाबहार-जहेदान रेल लाइन इस पूरे कॉरिडोर की सबसे कमजोर कड़ी मानी जा रही थी. अब इसके तैयार होने से मुंबई से मास्को तक माल ढुलाई में समय 40 दिन से घटकर करीब 20-22 दिन रह जाएगा और लागत में 30% तक की भारी बचत होगी.

मोदी सरकार का रुख: अमेरिका-इजरायल Vs राष्ट्रीय हित
चाबहार परियोजना को लेकर नई दिल्ली का रुख हमेशा से बेहद सधा हुआ और ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) पर आधारित रहा है:
अमेरिका और इजरायल से संतुलन: वाशिंगटन और तेल अवीव के साथ घनिष्ठ रणनीतिक साझेदारी होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चाबहार को कभी ठंडे बस्ते में नहीं जाने दिया. भारत ने 2024 में चाबहार के ‘शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल’ के दीर्घकालिक परिचालन के लिए 10 साल के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. अमेरिकी प्रतिबंधों की चेतावनियों के बीच भी भारत ने स्पष्ट किया कि चाबहार केवल एक द्विपक्षीय सौदा नहीं, बल्कि अफगानिस्तान में मानवीय सहायता और क्षेत्रीय स्थिरता की अंतरराष्ट्रीय जीवन रेखा है.
मिडिल ईस्ट तनाव और हमलों का असर: हालिया महीनों में जब मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष तेज हुआ और हवाई हमलों की खबरें आईं, तब चाबहार पर भी सवाल उठे थे. हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया था कि अमेरिकी हमलों में चाबहार स्थित भारत के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल और भारतीय बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और परियोजना पूरी तरह सुरक्षित है. भारत का कोई भी निवेश डूबा नहीं है, बल्कि भारत ने बंदरगाह के संचालन के लिए क्रेन और अत्याधुनिक मशीनरी की आपूर्ति जारी रखी है.
चाबहार पोर्ट पर भारत की आगे की राह और चुनौतियां
चाबहार-जहेदान ट्रैक पर पटरी बिछने के बाद असली परीक्षा अब शुरू होगी. नियमित रूप से मालगाड़ियों का संचालन शुरू करने के लिए ईरान, भारत और अफगानिस्तान के बीच कस्टम प्रक्रिया, ट्रांजिट संधियां, टैरिफ दरों और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप देना होगा. साथ ही, जहेदान से आगे इसे अफगानिस्तान के खाफ-हेरात रेल लिंक और तुर्कमेनिस्तान सीमा (सराख्स) तक जोड़ना होगा. कुल मिलाकर, ईरान की यह 630 किमी लंबी रेल लाइन भारत को यूरेशियाई महाद्वीप की आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग साबित होने जा रही है.
KNOWLEDGE FACTS: आपको पता है?
- चाबहार ईरान का एकमात्र सीधे खुले समुद्री मार्ग से जुड़ा पोर्ट है.
- चाबहार से हिंद महासागर तक सीधी समुद्री पहुंच है.
- जहेदान अफगानिस्तान की सीमा के करीब है.
- मध्य एशिया के पांचों प्रमुख देश Landlocked हैं.
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