Bharat Express DD Free Dish

‘मेट्रो-इंटरनेट बिना रुकावट चले’, CJP प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट के 5 निर्देशों से प्रशासन में हड़कंप

दिल्ली प्रदर्शन मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को कड़े निर्देश दिए हैं कि मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से जारी रखी जाएं तथा इंटरनेट बिना किसी रुकावट के बहाल रहे.

Supreme Court Delhi protest hearing, Delhi metro internet restoration SC order, Justice Joymalya Bagchi Delhi police, Solicitor General Tushar Mehta Supreme Court

CJP प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Delhi CJP Protest: राजधानी दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के दायरे को ध्यान में रखते हुए मेट्रो का नियमित संचालन जारी रखा जाए और इंटरनेट सेवाओं को बिना किसी रुकावट के बहाल किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों और वकीलों के पेशेवर कामकाज में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के 5 प्रमुख निर्देश (Supreme Court On CJP Protest)

  • मेट्रो और रेल सेवाएं: जब तक आर्टिकल 19(2) के तहत पब्लिक ऑर्डर में गड़बड़ी को रोकने के लिए कोई बेहद जरूरी नियम लागू न करना पड़े, तब तक मेट्रो और ट्रेनें सामान्य रूप से चलेंगी.
  • ट्रैफिक और बैरिकेड्स की समीक्षा: शहर में लोगों की आवाजाही पर ट्रैफिक नियमों के तहत कोई रोक नहीं होगी. कानून-व्यवस्था को देखते हुए लगाए गए बैरिकेड्स के फैसले की तुरंत समीक्षा की जाएगी.
  • इंटरनेट बहाली: शहर में इंटरनेट सुविधाएं बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलती रहेंगी.
  • शांतिपूर्ण आवाजाही: कानून के दायरे में रहकर शहर में लोगों का आना-जाना सुचारू रूप से जारी रहना चाहिए.
  • मनमाने ढंग से हिरासत नहीं: कानून द्वारा तय की गई उचित प्रक्रिया के बिना किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के लोग जमा हैं और जहां BNSS की धारा 163 लागू नहीं है.

धारा 163 और पुलिस कार्रवाई पर सख्त रुख (Supreme Court CJP Protest Update)

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आसपास लागू धारा 163 को लेकर अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि बोर्ड या पाबंदी से जुड़े नोटिस नहीं हटाए गए हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाए ताकि अदालतों तक आने-जाने वाले वकीलों और आम लोगों के मन से डर या शंका दूर हो सके.

ये भी पढ़ें: CJP लीडर और ध्रुव राठी की हुई रिहाई: बाहर आते ही तेवर और सख्त, क्या जंतर-मंतर पहुंचेंगे?

बेंच के जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने दो टूक कहा कि हमने संविधान के आर्टिकल 19 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की है और कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन पर हमें जवाब चाहिए. अदालत ने बिना बैज के पुलिस अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग किए जाने की भी जांच के आदेश दिए हैं. वहीं जस्टिस मोहना ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष जनहित में रुचि रखते हैं, तो उन्हें यह भरोसा दिलाना होगा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करेंगे और किसी को उकसाएंगे नहीं.

सॉलिसिटर जनरल का पक्ष (Tushar Mehta On CJP Protest)

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कल से इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और 10 अक्टूबर को मेट्रो की 4,176 ट्रेनें चली थीं, जिनमें से 303 में से केवल 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सीमित किया गया था. हालांकि, अदालत ने सरकार से हलफनामा दाखिल कर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करने को कहा है. साथ ही अदालत ने पिछले 9 अक्टूबर के आदेश की अवहेलना को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित प्राधिकारों से जवाब तलब किया है कि उनके खिलाफ अवमानना का मामला क्यों न चलाया जाए.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read