देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता दिख रहा है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को ऐलान किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित वोट चोरी के खिलाफ विपक्षी दल, युवा, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले तमाम लोग सोमवार, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे.
इस मार्च के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की जाएगी.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर कार्रवाई का आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखा पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि रविवार को दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने उतरे युवाओं के साथ पुलिस और सत्ता पक्ष के लोगों ने मारपीट की. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल इन युवाओं के दिलों में किसी के प्रति नफरत या गुस्सा नहीं, बल्कि सिर्फ देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की मोहब्बत थी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, ‘ऐसा भारत हम कतई नहीं चाहते.’
राहुल गांधी ने देश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे पार्टी, जाति, समुदाय, लिंग और राज्य की दीवारों से ऊपर उठकर इस मार्च में शामिल हों. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए अजित डोभाल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए कहा कि ये लोग भारत की आवाज को कभी दबा नहीं सकते. विपक्ष इस तानाशाही के आगे डरने वाला नहीं है और सरकार को इस मामले में पीछे हटना ही होगा.
विपक्ष का मुख्य एजेंडा और ‘डरो मत’ का नारा
राहुल गांधी ने अपने संदेश में ‘डरो मत’ का नारा देते हुए कहा कि सोमवार को पूरा देश और संविधान में आस्था रखने वाले लोग एक साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे. विपक्ष का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को बचाना और मतदाता सूची से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अदालत का दरवाजा खटखटाना है. सोमवार को होने वाले इस हाई-प्रोफाइल मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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