UP Election 2027: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने लखनऊ दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीति, चुनाव आयोग के नए नियमों और INDIA ब्लॉक की रणनीति पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने 2027 के यूपी चुनाव के समीकरणों से लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर केंद्र सरकार को घेरा.
असदुद्दीन ओवैसी ने सीएम योगी के ’80 बनाम 20′ के बयान का जवाब देते हुए चुनाव को 99% गरीब बनाम 1% अमीर बीजेपी समर्थकों की लड़ाई करार दिया. साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द करने और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने की मांग की. INDIA गठबंधन पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि शिकायत के लिए CJI नहीं, बल्कि पीएम से मिलना चाहिए.
UP चुनाव 2027 पर बोले ओवैसी
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने लखनऊ में पार्टी बैठकों के बाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा बयान दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ’80 बनाम 20′ के नैरेटिव पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा कि आगामी चुनाव असल में ’99 बनाम 1′ की लड़ाई होगा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 99% गरीब जनता एक तरफ है, जबकि 1% वे लोग हैं जिन्होंने देश की 40% संपत्ति पर कब्जा कर रखा है और जिन्हें बीजेपी के इकोसिस्टम का संरक्षण हासिल है.
मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को रद्द करने की मांग
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दे और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर ओवैसी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि जब यह कानून लोकसभा में पेश किया गया था, तभी चेतावनी दी गई थी कि इससे चुनाव आयोग की साख कमजोर होगी. उन्होंने मांग की कि चुनाव आयुक्तों को रिटायरमेंट के बाद कानूनी सुरक्षा देने वाले इस कानून को तुरंत रद्द किया जाए और नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री व विपक्ष के नेता के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने SIR व्यवस्था और 10 करोड़ नाम हटाए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए.
INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन और CJI से मुलाकात पर साधा निशाना
INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने साफ किया कि उनका इस गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है. वहीं INDIA ब्लॉक के नेताओं द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलने की कोशिश पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सांसद विधायिका का हिस्सा हैं, कार्यपालिका का नहीं. शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर सांसदों को कोई शिकायत है, तो उन्हें प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए न कि न्यायपालिका के प्रमुख से.
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-भारत एक्सप्रेस
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