भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान एक बार फिर चर्चा में है. IMF के मुताबिक, भारत 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है. इस अनुमान को अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और देश में मौजूद कारोबारी संभावनाओं के संकेत के तौर पर देखा है. हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तेज आर्थिक विकास का असली फायदा तभी नजर आएगा, जब आम लोगों को रोजगार के ज्यादा मौके मिलें और उनकी कमाई में सुधार हो.
अर्थशास्त्री विजय सरदाना के मुताबिक, भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में आर्थिक विकास की संभावनाएं काफी व्यापक हैं. 1.5 अरब से अधिक आबादी के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल है. यहां रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर तकनीक, उद्योग और सेवाओं तक कई क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने की गुंजाइश है.
सरदाना का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे समय में भारत की भूमिका और अहम हो सकती है. देश में बड़ी संख्या में लोग लगातार वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करते हैं. इससे कृषि, विनिर्माण, व्यापार और तकनीकी क्षेत्र को मांग मिलती है, जो आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करती है.
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल GDP के आंकड़ों से देश की आर्थिक तरक्की की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती. अगर विकास का फायदा आम परिवारों तक पहुंचाना है, तो रोजगार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा.
डिजिटल व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से मिल सकता है फायदा
अर्थशास्त्री और कर विशेषज्ञ सीए योगेंद्र कपूर का कहना है कि भारत में 7 प्रतिशत या उससे अधिक की विकास दर हासिल करने की क्षमता है. उनके मुताबिक, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, बेहतर बुनियादी ढांचा और आर्थिक लेनदेन में पारदर्शिता निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं.
कपूर ने आयकर और GST संग्रह में बढ़ोतरी को भी अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों से जोड़कर देखा. उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे औपचारिक व्यवस्था में आ रहा है. ऐसी व्यवस्था में कारोबार का हिसाब-किताब रखना आसान होता है और निवेशकों को भी आर्थिक गतिविधियों का आकलन करने में मदद मिलती है.
लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू महंगाई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं. तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है. इसलिए विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ महंगाई पर नियंत्रण भी जरूरी होगा.
वैश्विक संकटों के बीच विकास पर नजर
बाजार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने कहा कि भारत ने पिछले कई वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना किया है. इसके बावजूद देश की आर्थिक वृद्धि पर लगातार नजर बनी रही है.
शुक्ला के अनुसार, कारोबारी माहौल में बदलाव, सरकारी नीतियों और निजी निवेश की भूमिका आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में अहम रही है. उन्होंने भारत की युवा आबादी को भी देश की एक बड़ी ताकत बताया. युवाओं की भागीदारी से रोजगार, उत्पादन, तकनीक और उपभोक्ता बाजार में विस्तार की संभावनाएं पैदा होती हैं. हालांकि, इस क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए युवाओं को जरूरी कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है.
टैक्स में राहत और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से उम्मीदें
अर्थव्यवस्था के जानकार विनोद रावल ने IMF के 7 प्रतिशत विकास दर के अनुमान को भारत के लिए सकारात्मक संकेत बताया. उनका कहना है कि घरेलू मांग, सरकारी नीतियों और नए तकनीकी क्षेत्रों में निवेश से आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है.
रावल ने 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर में राहत देने के फैसले का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, इससे पात्र करदाताओं के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बच सकता है. अगर लोग इस अतिरिक्त रकम का इस्तेमाल खरीदारी और सेवाओं पर करते हैं, तो बाजार में मांग बढ़ने की संभावना रहती है.
इसके अलावा, भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास को भी उन्होंने अहम माना. चिप निर्माण और इससे जुड़े कारोबार का विस्तार होने पर तकनीकी उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. हालांकि, इन क्षेत्रों का वास्तविक योगदान इस बात पर निर्भर करेगा कि परियोजनाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं और उनका लाभ घरेलू उद्योग तक कितना पहुंचता है.
रावल ने पेट्रोल की कीमतों में संभावित बदलाव को लेकर भी उम्मीद जताई, लेकिन कीमतों के अक्टूबर की शुरुआत से पहले वाले स्तर पर लौटने की बात की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है. इसे फिलहाल एक संभावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
आम आदमी के लिए क्या मायने रखता है 7% विकास दर का अनुमान?
IMF का अनुमान भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिवार की आर्थिक स्थिति अपने आप बेहतर हो जाएगी. किसी देश की GDP बढ़ना महत्वपूर्ण है, मगर आम लोगों के लिए रोजगार की उपलब्धता, वेतन में बढ़ोतरी, महंगाई और रोजमर्रा के खर्च भी उतने ही मायने रखते हैं.
विशेषज्ञों की राय से साफ है कि भारत के सामने विकास के अवसर मौजूद हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. निवेश बढ़ाना, महंगाई को काबू में रखना, युवाओं के लिए रोजगार तैयार करना और विकास का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना आगे की प्राथमिकताएं रहेंगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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