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पेपर लीक और नकल पर नकेल! मध्य प्रदेश बना देश का पहला राज्य, चार महानगरों में गठित हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट

पेपर लीक और नकल जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने चार महानगरों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया है. चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मामलों का ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

Madhya Pradesh Government Forms Fast Track Courts For Paper Leak Exam Cheating

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ अब पड़ेगा भारी (AI IMAGE)

Paper Leak Fast Track Court: अजय भटनागर/भोपाल:मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं की शुद्धता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए मोहन यादव सरकार ने एक बेहद सख्त और कड़ा कदम उठाया है. राज्य में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और नकल के मामलों पर पूरी तरह शिकंजा कसने के लिए सरकार और उच्च न्यायालय के निर्देश पर प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन कर दिया गया है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला देश का सबसे पहला राज्य बन गया है, जिसने नकल माफिया के खिलाफ इस तरह की त्वरित न्यायिक प्रणाली तैयार की है.

किन महानगरों में बनाई गईं विशेष अदालतें?

यह विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर महानगरों में स्थापित की गई हैं, जिनका अधिकार क्षेत्र पूरे प्रदेश के जिलों में बंटा हुआ है:

  • भोपाल विशेष न्यायालय: इसके अंतर्गत भोपाल के अलावा सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों के मामलों की सुनवाई होगी.
  • इंदौर विशेष न्यायालय: इसके दायरे में इंदौर के साथ-साथ धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन, देवास और पूरा मालवा-निमाड़ क्षेत्र आएगा.
  • ग्वालियर विशेष न्यायालय: इसके अंतर्गत ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ जिलों के मामले सुने जाएंगे.
  • जबलपुर विशेष न्यायालय: इसके कार्यक्षेत्र में जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल समेत महाकौशल और बुंदेलखंड के अन्य जिले शामिल होंगे.

3 महीने में ट्रायल पूरा करने का सख्त लक्ष्य

इन विशेष अदालतों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें चार्जशीट दाखिल होने के महज 3 महीने के भीतर मामलों का निपटारा करने का कड़ा लक्ष्य दिया गया है. मामलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के नेतृत्व में विशेष एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है. इसके अलावा अदालतों में मुकदमों की पैरवी के लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की गई है, जो साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतिकरण और गवाहों के प्रबंधन पर पूरा ध्यान देंगे ताकि कोई भी दोषी कानून की गिरफ्त से बच न सके.

राज्य सरकार की इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य उन लाखों मेहनतकश और योग्य युवाओं के हितों की रक्षा करना है जो अपनी कड़ी मेहनत के बल पर परीक्षा देते हैं. सरकार का यह सख्त संदेश साफ है कि परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वालों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब कानून पूरी सख्ती से पेश आएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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