केंद्रीय गृह सचिव द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अवमानना नोटिस के जवाब में बिना शर्त माफी मांगने की मीडिया खबरों पर अब स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है. आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि मीडिया में चल रही ऐसी खबरें पूरी सच्चाई को बयान नहीं करतीं और यह अदालती कार्यवाही की एक तय कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा मात्र है.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का अनिवार्य नियम?
दरअसल, कानून और अदालती व्यवस्था के मुताबिक जब भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से किसी भी अधिकारी या पक्ष को अवमानना (Contempt of Court) का नोटिस जारी किया जाता है, तो जवाब देने वाले पक्ष के लिए हलफनामे (Affidavit) की शुरुआत बिना शर्त माफीनामा लिखकर करना अनिवार्य होता है. यह एक कानूनी प्रक्रियात्मक आवश्यकता है, जिसका पालन हर अवमानना याचिका के जवाब में अनिवार्य रूप से किया जाता है. इसके बाद ही कोई पक्ष अपने समर्थन में बाकी तथ्य और कानूनी तर्क अदालत के सामने पेश कर सकता है.
अधिकारियों ने किया प्रक्रिया का पालन
इसी कानूनी परंपरा और नियम का पालन करते हुए केंद्रीय गृह सचिव, पुलिस आयुक्त और अन्य संबंधित शीर्ष अधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के पहले पैराग्राफ में बिना शर्त माफी का जिक्र किया गया था. हालांकि, हलफनामे के मुख्य भाग में सभी आवश्यक और विस्तृत आंकड़े व तथ्य कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं.
अदालत में दिए गए विवरणों से यह साफ तौर पर साबित हो गया है कि सरकार और पुलिस द्वारा उठाए गए सभी कदम और की गई कार्रवाइयां पूरी तरह से कानून के दायरे में थीं. ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का कोई भी मामला नहीं बनता है. मीडिया रिपोर्टों को इसी कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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