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अनोखा दुर्गा पंडाल: फूल-पत्ती नहीं, कॉपी-किताब और पेन से किया गया देवी मां का अद्भुत श्रृंगार! बच्चों की खुलेगी किस्मत

UNIQUE STATIONERY THEMED DURGA PANDAL IN BILASPUR: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के मसानगंज में इस वर्ष शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर एक अनोखा दुर्गा पूजा पंडाल स्थापित किया गया है. यह पंडाल और देवी मां के श्रृंगार को पूरी तरह स्टेशनरी सामग्री – कॉपी-किताब, पेन, पेंसिल और स्कूल बैग से सजाया है.

A unique Durga pandal in Bilaspur

नवरात्रि के दौरान आमतौर पर देश भर में भव्य दुर्गा पूजा पंडालों को आकर्षक लाइटों, फूलों, मखमली कपड़ों और विशालकाय प्रतिकृतियों से सजाया जाता है. लेकिन छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर के मसानगंज इलाके में इस बार भक्ति, कला और सामाजिक सरोकार का एक ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला है, जिसकी चारों तरफ सराहना हो रही है. मसानगंज में इस वर्ष दुर्गा पंडाल को ‘स्टेशनरी वर्ल्ड’ (Stationery World) की अनूठी थीम पर तैयार किया गया है.

इस पंडाल में मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के श्रृंगार से लेकर पूरे पंडाल की सजावट तक कॉपी-किताब, पेन, पेंसिल, स्केल, रबर, शार्पनर और स्कूल बैग जैसे स्टेशनरी उत्पादों का बड़े ही कलात्मक ढंग से उपयोग किया गया है.

विसर्जन के बाद जरूरतमंद बच्चों में बंटेगी स्टेशनरी

इस पंडाल की सबसे प्रशंसनीय और मानवीय पहलू यह है कि उत्सव और विसर्जन के समाप्त होते ही सजावट में इस्तेमाल की गई इस समूची स्टेशनरी को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा. समिति के सदस्यों ने निर्णय लिया है कि विसर्जन के दिन यह सारा शैक्षणिक सामान विभिन्न बस्तियों और स्कूलों के जरूरतमंद बच्चों में निशुल्क वितरित किया जाएगा, ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे बच्चों की पढ़ाई में मदद मिल सके.

58 साल पुरानी समिति का सामाजिक संदेश

मसानगंज पूजा समिति के एक कार्यकर्ता ने बताया कि उनकी समिति पिछले 58 वर्षों से निरंतर यहां मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना करती आ रही है. उन्होंने कहा:

“हमारी समिति हर वर्ष कुछ नया करने का प्रयास करती है. इस 58वें वर्ष में सभी सदस्यों ने मिलकर यह तय किया कि सजावट ऐसी हो जो सिर्फ आंखों को सुंदर न लगे, बल्कि किसी के जीवन में उजाला भी लाए. पूरे पंडाल को सदस्यों और स्थानीय कारीगरों ने मिलकर स्टेशनरी के सामान से सजाया है.”

वहीं समिति के एक अन्य सदस्य ने बताया कि ‘स्टेशनरी वर्ल्ड’ में जितनी भी अध्ययन सामग्री लगाई गई है, उसे व्यवस्थित तरीके से निकालकर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चों तक सुरक्षित पहुंचाया जाएगा.

माता रानी का अद्भुत श्रृंगार देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

पंडाल में दर्शन करने पहुंचे एक श्रद्धालु ने कहा,

“आमतौर पर देवी मां का श्रृंगार वस्त्रों, आभूषणों और फूलों से होता है, लेकिन यहां कारीगरों ने स्टेशनरी के सामान का उपयोग कर माता रानी का ऐसा मनमोहक रूप गढ़ा है जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है. स्टेशनरी में ही बच्चों का उज्ज्वल भविष्य छिपा होता है और यह अनोखा स्वरूप बच्चों पर मां सरस्वती और मां दुर्गा के सीधे आशीर्वाद का प्रतीक है. यह हमारे पूरे शहर के लिए गौरव का विषय है.”

भक्ति के साथ शिक्षा और परोपकार को जोड़ने वाली मसानगंज की यह अनूठी पहल आज उत्सवों के बदलते स्वरूप और सामाजिक सरोकारों के लिए एक मिसाल बन चुकी है.

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