हरियाणा की बेटी ने दुनिया में बनाया नाम
भारतीय महिला मुक्केबाजी की स्टार खिलाड़ियों में शामिल नीतू घंघास आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 और महिला विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है. हालांकि, सफलता की इस ऊंचाई तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था. इसके पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और परिवार का त्याग छिपा है.
भिवानी से शुरू हुई मुक्केबाजी की कहानी
नीतू घंघास का जन्म 19 अक्टूबर 2000 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था. भिवानी को भारत की बॉक्सिंग राजधानी भी कहा जाता है, क्योंकि यहां से विजेंदर सिंह जैसे बड़े मुक्केबाज निकले हैं. ऐसे माहौल में पली-बढ़ीं नीतू की रुचि भी बचपन से ही इस खेल की ओर बढ़ने लगी. उनके पिता जय भगवान ने उन्हें पहली बार बॉक्सिंग से परिचित कराया. इसके बाद नीतू ने केवल 12 साल की उम्र में मुक्केबाजी की ट्रेनिंग शुरू कर दी.
खेल छोड़ने का भी आ गया था ख्याल
शुरुआती दौर नीतू के लिए काफी कठिन रहा. उन्हें कई चुनौतियों और परेशानियों का सामना करना पड़ा. हालात ऐसे भी आए जब उन्होंने बॉक्सिंग को अलविदा कहने का मन बना लिया था. लेकिन कठिन समय में उनके पिता लगातार उनके साथ खड़े रहे और बेटी का हौसला बढ़ाते रहे. यही समर्थन आगे चलकर नीतू के करियर की सबसे बड़ी ताकत बना.
पिता ने नौकरी से ली छुट्टी और कर्ज भी लिया
नीतू के सपनों को पूरा करने के लिए उनके पिता ने बड़ा त्याग किया. उन्होंने अपनी नौकरी से तीन साल की अवैतनिक छुट्टी ली ताकि बेटी की तैयारी पर पूरा ध्यान दे सकें. इतना ही नहीं, उन्होंने करीब 6 लाख रुपये का कर्ज भी लिया. जय भगवान ने न सिर्फ नीतू की ट्रेनिंग की व्यवस्था संभाली, बल्कि उनके खान-पान और फिटनेस का भी विशेष ध्यान रखा. परिवार का यह समर्पण बाद में नीतू की सफलता की नींव बना.
कोच की नजर पड़ी और बदल गई जिंदगी
नीतू के करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब प्रसिद्ध कोच जगदीश सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना. इसके बाद उन्हें भिवानी बॉक्सिंग क्लब में बेहतर प्रशिक्षण का मौका मिला. नीतू रोजाना अपने पिता के साथ स्कूटर से लगभग 40 किलोमीटर की यात्रा कर ट्रेनिंग के लिए जाती थीं. मेहनत का असर जल्द दिखा और उन्होंने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू कर दी.
जूनियर स्तर पर ही हासिल की बड़ी सफलता
साल 2017 में नीतू ने यूथ इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया. इसके बाद 2018 में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई और यूथ चैंपियन का खिताब हासिल किया. कोविड-19 महामारी के दौरान खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं, जिससे उनके करियर की रफ्तार भी कुछ समय के लिए धीमी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
शानदार वापसी के बाद राष्ट्रीय चैंपियन बनीं
कोरोना काल के बाद नीतू ने दमदार वापसी की और वर्ष 2021 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया. यह जीत उनके लिए आगे की बड़ी सफलताओं का रास्ता खोलने वाली साबित हुई.
मैरी कॉम को हराकर बटोरी सुर्खियां
साल 2022 नीतू के करियर का सबसे अहम साल माना जाता है. कॉमनवेल्थ गेम्स ट्रायल के दौरान उनका मुकाबला उनकी आदर्श खिलाड़ी मैरी कॉम से हुआ. उस समय मैरी कॉम घुटने की समस्या से जूझ रही थीं. नीतू ने इस मुकाबले में जीत दर्ज कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और कॉमनवेल्थ गेम्स की राह बनाई.
कॉमनवेल्थ से वर्ल्ड चैंपियन तक का सफर
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में नीतू ने शानदार बॉक्सिंग का प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसके अगले ही वर्ष यानी 2023 में महिला विश्व चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. पूरे टूर्नामेंट में वह अपराजित रहीं और महज 22 वर्ष की उम्र में विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया.
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अर्जुन पुरस्कार से हुआ सम्मान
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार देश का नाम रोशन करने वाली नीतू घंघास को उनकी उपलब्धियों के लिए वर्ष 2024 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके संघर्ष, मेहनत और खेल के प्रति समर्पण की बड़ी पहचान माना जाता है. आज नीतू लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो यह दिखाती हैं कि मजबूत इरादों और परिवार के सहयोग से कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है.
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