एक श्लोकी रामायण
सनातन परंपरा में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी यानी दशहरे का महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष तिथियों की घट-बढ़ के कारण दशमी तिथि 20 और 21 अक्टूबर दो दिन पड़ रही है, लेकिन धार्मिक गणना और अधिकांश पंचांगों के अनुसार 20 अक्टूबर को ही यह पर्व मनाना श्रेयस्कर बताया गया है.
दशहरे के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम द्वारा लंकापति रावण का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना करने की पावन स्मृति में रामकथा के श्रवण और पठन का विशेष विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक समयाभाव के कारण संपूर्ण रामायण या रामचरितमानस का पाठ नहीं कर पाते, उनके लिए ‘एक श्लोकी रामायण’ का पाठ कल्पवृक्ष के समान फलदायी माना गया है.
कल्पवृक्ष के समान फलदायी 1 श्लोकी रामायण
संस्कृत का यह दिव्य श्लोक भगवान श्रीराम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को क्रमवार संजोए हुए है:
आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्धि रामायणम्।।
एक श्लोक में समाया संपूर्ण रामायण का सार
आदौ राम तपोवनादि गमनं (तपस्वी के रूप में वन गमन): अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक से ठीक एक रात पूर्व माता कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से मांगे गए वचनों (भरत को राज्य और राम को 14 वर्ष का वनवास) को पूरा करने के लिए श्रीराम ने सहर्ष वनवास स्वीकार किया. उनके साथ माता सीता और अनुज लक्ष्मण भी वन गए.
हत्वा मृगं कांचनम् (स्वर्ण मृग का वध): पंचवटी प्रवास के दौरान शूर्पणखा के अपमान के प्रतिशोध में रावण ने कपटी मारीच को सोने का मृग बनाकर भेजा. देवी सीता के आग्रह पर श्रीराम ने उस मायावी स्वर्ण मृग का आखेट किया.
वैदेही हरणं (माता सीता का हरण): मारीच के छलपूर्वक पुकारने पर जब लक्ष्मण भैया राम की खोज में गए, तब कुटिया में अकेली माता सीता का कपटी रावण ने साधु वेश धरकर छल से हरण कर लिया.
जटायु मरणं (पक्षीराज जटायु का बलिदान): पुष्पक विमान से लंका ले जाते समय गिद्धराज जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए रावण से भीषण युद्ध किया और घायल होकर प्राण त्यागने से पूर्व प्रभु राम को सीता हरण का पूरा वृत्तांत बताया.
सुग्रीव सम्भाषणं (सुग्रीव से मित्रता): किष्किंधा में पवनपुत्र हनुमान के माध्यम से श्रीराम और वानरराज सुग्रीव की भेंट हुई. दोनों ने एक-दूसरे के संकट में साथ निभाने का वचन दिया.
बालीनिर्दलनं (बाली का उद्धार): मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने बाण चलाकर अत्याचारी बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का अधिपति बनाया.
समुद्रतरणं, लंकापुरी दाहनं (समुद्र लांघना और लंका दहन): वीर हनुमान ने विशाल समुद्र को पार कर अशोक वाटिका में माता सीता की खोज की और रावण की स्वर्णमयी लंका का दहन कर प्रभु को समाचार दिया. इसके बाद नल-नील की सहायता से रामसेतु का निर्माण कर सेना लंका पहुंची.
पश्चाद्रावण कुम्भकर्ण हननं (अधर्मियों का विनाश): शांति का दूत बनकर गए अंगद के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद भीषण धर्मयुद्ध हुआ. लक्ष्मण ने मेघनाद का और श्रीराम ने कुंभकर्ण तथा महाबली रावण का वध कर माता जानकी को मुक्त कराया.
अंततः सभी अयोध्या लौटे, जहां प्रभु श्रीराम का भव्य राज्याभिषेक हुआ और आदर्श ‘रामराज्य’ की स्थापना हुई. विजयादशमी के पावन पर्व पर स्नान-ध्यान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इस एक श्लोक का 11, 21 या 108 बार पाठ करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और विजय का वास होता है.
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