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तारीख के बजाय दशहरे पर क्यों मनाता है RSS अपना स्थापना दिवस? जानिए खास वजह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन हुई थी. संघ इस पर्व को केवल तारीख के बजाय शक्ति उपासना, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प दिवस के रूप में मनाता है.

Why RSS Celebrates Foundation Day On Vijayadashami Dussehra History

RSS Foundation Day: विजयादशमी यानी दशहरा केवल असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक ही नहीं है. यह दिन देश के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है. जब देश भर में रावण दहन और मां दुर्गा की विजय का जश्न मनाया जाता है, तब संघ परिवार इस पावन अवसर को अपने स्थापना दिवस और संकल्प पर्व के रूप में मनाता है. दरअसल, संघ के लिए विजयादशमी का दिन महज एक ऐतिहासिक तारीख नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा माध्यम है.

विजयदशमी का दिन और RSS का क्या है नाता?

दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शुरुआत 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के ही शुभ दिन हुई थी. नागपुर के मोहिते के बाड़े में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने महज पांच स्वयंसेवकों के साथ मिलकर इस संगठन की नींव रखी थी. उस दौर में जब भारत अंग्रेजों की गुलामी झेल रहा था, तब डॉ. हेडगेवार का मानना था कि देश को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए समाज का संगठित और अनुशासित होना बेहद जरूरी है. इसी सोच के साथ शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है.

स्थापना दिवस की जगह विजयादशमी उत्सव क्यों?

संघ की कार्यपद्धति में किसी अंग्रेजी तारीख या सालगिरह का औपचारिक जश्न मनाने के बजाय विजयादशमी उत्सव मनाने की समृद्ध परंपरा है. इसके पीछे कई खास वैचारिक और सांस्कृतिक कारण मौजूद हैं:

शक्ति और शस्त्र की उपासना: दशहरे का दिन अधर्म के अंत और संगठित शक्ति का प्रतीक माना गया है. संघ इस दिन अपने मुख्यालय से लेकर देशभर की शाखाओं में विशेष शस्त्र पूजा का आयोजन करता है, जो समाज को समर्थ और शक्तिशाली बनाने का संदेश देता है.

संस्कार और भगवा ध्वज: संघ की स्थापना के तीन साल बाद व्यास पूर्णिमा को भगवा ध्वज को परम गुरु माना गया था. विजयादशमी का पर्व स्वयंसेवकों को त्याग, अनुशासन, सामाजिक समरसता और देशसेवा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है.

संघ अपने इस शताब्दी वर्ष के पड़ाव में कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और सामाजिक सद्भाव जैसे अहम पंच परिवर्तनों पर जोर दे रहा है, जिसका मूल आधार विजयादशमी की चेतना से ही प्रेरित है.

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-भारत एक्सप्रेस



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