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दिल्ली बनेगी साबरमती! बदलेगी यमुना की तकदीर, क्या है 9000 करोड़ का प्लान?

Delhi Yamuna Cleaning Plan: दिल्ली सरकार 9 हजार करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट से साबरमती की तर्ज पर बदलेगी यमुना का रूप. जानिए रिवरफ्रंट, 22 नालों पर STP और सीवर नेटवर्क का पूरा खाका.

Delhi Yamuna Riverfront And Cleaning Master Plan Rekha Gupta Like Sabrmati

Yamuna Cleaning Project Delhi: झाग की सफेद चादर, किनारों पर जमा कचरा और उठती दुर्गंध दशकों से राजधानी में यमुना की यही बदहाल तस्वीर देश में चर्चा का विषय बनी रही है. आस्था की डुबकी हो या छठ पर्व के अर्घ्य का समय, यमुना की गंदगी हर बार व्यवस्था पर तीखे सवाल दागती आई है. लेकिन अब दिल्लीवासियों का इंतजार खत्म होने की कगार पर है. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब यमुना सिर्फ बहती हुई मैली नदी नहीं रहेगी, बल्कि इसके कायाकल्प का ऐसा मास्टरप्लान जमीन पर उतर रहा है जो राजधानी के स्वरूप को हमेशा के लिए बदल देगा.

दिल्ली को अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर नया रूप देने के लिए दिल्ली सरकार और केंद्र ने करीब 8,991 करोड़ रुपये की 43 परियोजनाओं का खाका खींच लिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखेंगे.

10 जल परियोजनाओं का लोकार्पण और 33 नई परियोजनाओं की शुरुआत शामिल है, जिसका सीधा मकसद यमुना में गिरने वाले सीवेज को रोकना, लीकेज बंद करना और हर घर तक 24 घंटे साफ पानी पहुंचाना है.

दिल्ली में यमुना की हकीकत

  • 52 किलोमीटर का दायरा: दिल्ली की सीमा के भीतर यमुना कुल 52 किमी इलाके में बहती है.
  • 22 किमी का सबसे प्रदूषित जोन: वजीराबाद से ओखला बैराज के बीच का 22 किमी का स्ट्रेच सबसे ज्यादा मैला और बदहाल है.
  • 25 करोड़ गैलन का अंतर: राजधानी में रोजाना सीवर शोधन क्षमता में करीब 25 करोड़ गैलन (MGD) की बड़ी कमी दर्ज की गई है.
  • 28 प्लांट अपग्रेड: कुल 37 सीवर शोधन संयंत्रों (STP) में से 28 को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जा चुका है.

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नदी में सीधे नहीं गिरेगा गंदा पानी (Yamuna River 22 Drains STP Plant)

यमुना में जहर घोलने वाले 22 बड़े नालों पर अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जाएंगे, जिससे अशोधित पानी सीधे नदी की धारा में न मिले. नालों के पानी को पूरी तरह ट्रीट और रिसाइकिल करके बागवानी व अन्य उपयोगों में लाया जाएगा. इसके तहत एशिया के सबसे बड़े ओखला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता को बढ़ाकर 56.4 करोड़ लीटर प्रतिदिन किया जा रहा है, साथ ही रिठाला एसटीपी का भी व्यापक आधुनिकीकरण होगा.

  • यमुना को गंदा होने से बचाने के लिए कॉलोनियों के स्तर पर भी बड़ा अभियान शुरू हुआ है.
  • पूर्वी दिल्ली के करावल नगर और मुस्तफाबाद की बस्तियों में 25 हजार परिवारों को सीधे सीवर नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, ताकि घरेलू गंदगी खुली नालियों में न बहे.
  • बिना सीवर वाले नरेला और बुराड़ी इलाकों में क्रमशः 10 और 25 किमी लंबी सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी, जिससे जलभराव और बीमारियों पर लगाम लगेगी.

45% से घटकर 15% पर आएगा वेस्टेज (Delhi Water Leakage Removal Technology)

दिल्ली में पेयजल की बर्बादी और लीकेज वर्तमान में 30 से 45 फीसदी के बीच है, जिसे आधुनिक तकनीक के दम पर अगले 3 साल के भीतर 15 फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है. लगभग 30 लाख गैर-पंजीकृत पानी के कनेक्शनों को वैध किया जाएगा. आपूर्ति व्यवस्था में स्मार्ट फ्लो मीटर, क्लोरीन और प्रेशर सेंसर लगाए जा रहे हैं ताकि बूंद-बूंद पानी का हिसाब रहे. इसके साथ ही गर्मियों में हरियाणा से आने वाले पानी में अमोनिया की समस्या से निपटने के लिए ओखला में 6 MGD अमोनिया रिमूवल तकनीक अपनाई जा रही है.

साबरमती मॉडल पर बनेगा यमुना रिवरफ्रंट (Delhi Yamuna Riverfront Sabarmati Model)

अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की सफलता को दिल्ली अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अपनाएगी. इसके लिए गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साथ एमओयू (MoU) करने की तैयारी है.

  • फेज 1: पल्ला से लेकर वजीराबाद बैराज तक रिवरफ्रंट का विकास होगा.
  • फेज 2: वजीराबाद से ओखला बैराज तक का इलाका विकसित किया जाएगा.
  • पब्लिक स्पेस और ग्रीनरी: नदी के दोनों किनारों पर साइकिलिंग ट्रैक, जॉगिंग और वॉक-वे, हरे-भरे पार्क, ओपन एम्फीथिएटर और बच्चों के खेल मैदान तैयार होंगे.

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एक नई सुबह की ओर दिल्ली (Delhi Yamuna Riverfront Master Plan)

किसी भी ऐतिहासिक शहर की पहचान उसकी नदी की सेहत से आंकी जाती है. लंदन की टेम्स और पेरिस की सीन नदी की तरह यमुना का स्वच्छ होना केवल पर्यावरणीय जरूरत नहीं, बल्कि दिल्ली के स्वाभिमान का सवाल है. ढाई साल के भीतर 100 फीसदी सीवर शोधन और साबरमती जैसा जीवंत किनारा मिलने के बाद दिल्लीवाले शाम को कंक्रीट के जंगलों से निकलकर स्वच्छ हवा और बहते नीले पानी के बीच सांस ले सकेंगे. यह 8,000 करोड़ का निवेश सिर्फ कंक्रीट और पाइपलाइन का नहीं, बल्कि दिल्ली की नई सांस्कृतिक पहचान गढ़ने का संकल्प है.



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