राजा भैया की बेंती कोठी में शस्त्र पूजन
Raja Bhaiya Shastra Pujan: प्रतापगढ़ में विजयदशमी के अवसर पर कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बेंती कोठी एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई. यहां पारंपरिक शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थकों ने हिस्सा लिया. आयोजन की तस्वीरों में सैकड़ों नहीं बल्कि एक हजार से अधिक हथियार व्यवस्थित तरीके से रखे नजर आए. पूरे परिसर में धार्मिक और पारंपरिक माहौल देखने को मिला.
वैदिक मंत्रों के बीच हुआ पूजन
कार्यक्रम के दौरान 11 विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार शस्त्रों का पूजन कराया. मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान के बीच राजा भैया भी मौजूद रहे. पूजा के दौरान श्रद्धा और परंपरा का अलग ही संगम देखने को मिला. समर्थक भी बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में पहुंचे और पूरे आयोजन का हिस्सा बने.
राजा भैया का बयान बना चर्चा का विषय
शस्त्र पूजन संपन्न होने के बाद राजा भैया ने अपने अंदाज में एक टिप्पणी भी की, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से होने लगी. उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्हें खुद अंदाजा नहीं था कि हथियारों की संख्या इतनी अधिक है. उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
वर्षों पुरानी परंपरा आज भी कायम
बेंती कोठी में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा काफी पुरानी मानी जाती है. शुरुआत में इस आयोजन में केवल राजघराने से जुड़े ऐतिहासिक और पारंपरिक हथियार ही रखे जाते थे. हालांकि समय के साथ इसमें बदलाव आया और अब राजा भैया के समर्थक भी अपने लाइसेंसी हथियारों के साथ कार्यक्रम में शामिल होते हैं. इसी वजह से हर साल यहां बड़ी संख्या में शस्त्र एकत्रित होते हैं.
अतुल महाराज की मौजूदगी में संपन्न हुआ अनुष्ठान
जानकारी के अनुसार प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य अतुल महाराज के मार्गदर्शन में पूरे धार्मिक कार्यक्रम को संपन्न कराया गया. पूजा के बाद आरती हुई, फिर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया. राजा भैया पारंपरिक कुर्ता-धोती में नजर आए, जबकि उनके समर्थकों ने भी भारतीय परंपरा के अनुरूप वेशभूषा धारण की थी.
सनातन परंपरा का संदेश
राजा भैया ने कहा कि विजयदशमी अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक पर्व है. उनके अनुसार शस्त्र पूजन भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस दिन केवल अस्त्र-शस्त्र ही नहीं बल्कि गौवंश, घोड़ों और वाहनों का भी सम्मानपूर्वक पूजन किया जाता है. उनका मानना है कि यह परंपरा समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम करती है.
कई प्रमुख नेता और समर्थक रहे मौजूद
आयोजन में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के कई पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और राजा भैया के परिवार के सदस्य भी शामिल हुए. उनके पुत्र शिवराज सिंह और बृजराज सिंह सहित बड़ी संख्या में समर्थकों ने कार्यक्रम में भाग लेकर परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया. दशहरे के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम इलाके में आकर्षण का केंद्र बना रहा.
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-भारत एक्सप्रेस
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