आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव पर SC सख्त, नामांकन विवाद पर कल तक फैसला लेने का निर्देश
Andhra Pradesh local body polls: आंध्र प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है. कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से कहा है कि वह वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की नामांकन की समयसीमा बढ़ाने की मांग पर कल तक फैसला ले. यह मामला उन इलाकों से जुड़ा है, जहां कथित हिंसा के चलते पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानी हुई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी नहीं करने का भी निर्देश दिया है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की अवकाशकालीन पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया.
वाईएसआर ने क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा?
पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. पार्टी का आरोप है कि राज्य में बड़े पैमाने पर हुई कथित हिंसा के कारण उसके कई उम्मीदवार चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सके.
पार्टी ने मांग की थी कि नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए, उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा दी जाए और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त नामांकन केंद्र बनाए जाएं. हालांकि, हाई कोर्ट ने नामांकन दाखिल करने की समयसीमा एक दिन बढ़ाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद वाईएसआर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
25 अक्टूबर तक जारी नहीं होगी अंतिम सूची
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के मुताबिक, राज्य चुनाव आयोग को पहले पार्टी की मांग पर फैसला लेना होगा. साथ ही उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करने की प्रक्रिया 25 अक्टूबर तक टालनी होगी. इससे उन उम्मीदवारों को राहत मिलने की संभावना है, जो कथित हिंसा के कारण अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाए थे. हालांकि, नामांकन की समयसीमा बढ़ाने पर अंतिम फैसला राज्य चुनाव आयोग को लेना है.
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मतदाता सूची को लेकर भी दिए थे निर्देश
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आंध्र प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कानून के मुताबिक होने चाहिए. कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के आधार पर चुनाव कराने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की थी.
कोर्ट के मुताबिक, यदि चुनावों की घोषणा अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद होती है, तो उसी सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. वहीं, घोषणा अंतिम सूची जारी होने से पहले होने पर पुरानी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाने चाहिए. अब सभी की नजरें राज्य चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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