Delhi High Court: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 22 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. बोरा ने दिल्ली पुलिस के बॉन्ड नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दायर याचिका में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और जमानती पेश करने का निर्देश दिया गया है.
नेहा बोरा को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया
नेहा बोरा ने दायर याचिका में आरोप लगाया है कि 16 अक्टूबर को हिरासत से रिहा होने के बाद से सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस के जवान बोरा का पीछा कर रहे हैं और उसे डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं. बोरा ने बीएनएसएस की धारा 126 और 130 के तहत जारी किए गए नोटिस पर रोक लगाने और उसे वापस लेने की मांग की है. दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर को नोटिस जारी कर नेहा बोरा को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था. भेजे गए नोटिस में उन्हें जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानती देने को कहा गया है.
मामला 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ा है
बोरा के वकील मजिस्ट्रेट को जानकारी देने की नेहा मुचलके पर हस्ताक्षर नहीं करेगी. नेहा बोरा की ओर से यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है, जब सीईसी के खिलाफ प्रदर्शनों को जारी रखने के प्रयास देखे जा रहे हैं. आइसा का कहना है कि यह नोटिस अस्पष्ट है, तथ्यों से गलत है और संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है. ये अनुच्छेद अभिव्यक्ति की आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है. आइसा ने सवाल उठाया है कि 16 अक्टूबर को हिरासत से रिहा होने के बाद से ही दिल्ली पुलिस के सादे कपड़ों में जवान नेहा का पीछा क्यों कर रहे है.
संगठन ने पूछा कि क्या किसी छात्रा और छात्र नेता को डराने-धमकाने के लिए पीछा करना दिल्ली पुलिस का नया प्रोटोकॉल बन गया है? बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट इस हफ्ते छुट्टियों पर हैं. फिर भी आइसा की लीगल टीम दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने मेंशन कर तत्काल सुनवाई की मांग करेगी. यह पूरा मामला 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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