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पीलीभीत में 13 हजार वोटरों के नाम कैसे बदले? 53 लोगों की टीम ने 96 घंटे में खंगाली 3.48 लाख वोटरों की लिस्ट

UP News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है. कांग्रेस ने 13,150 मतदाताओं के नाम बदलने, 804 नाम हटाने और 2,600 नए नाम जोड़ने का दावा किया है.

Pilibhit Voter List Dispute

पीलीभीत वोटर लिस्ट विवाद

UP News: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी शुरुआती चरण में हैं, लेकिन उससे पहले ही मतदाता सूची को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां कांग्रेस ने हजारों वोटरों के रिकॉर्ड में कथित बदलाव का आरोप लगाया है. पार्टी का दावा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम बदल दिए गए, जबकि उनका EPIC नंबर, उम्र और लिंग पहले जैसा ही रखा गया.

कांग्रेस के अनुसार यह सिर्फ सामान्य तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि एक बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता का मामला है. पार्टी का दावा है कि जिन 13,150 मतदाताओं के रिकॉर्ड में यह बदलाव मिला है, वे सभी मुस्लिम समुदाय से जुड़े हैं. इसके अलावा 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने और करीब 2,600 नए नाम जोड़ने का भी आरोप लगाया गया है.

शिकायत से शुरू हुई पूरी पड़ताल

यह मामला तब सामने आया जब पीलीभीत से कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार कुमुद गंगवार तक कुछ मतदाताओं की शिकायत पहुंची. शिकायतों में कहा गया कि वोटर सूची में दर्ज जानकारी वास्तविक पहचान से मेल नहीं खा रही है. शुरुआत में इस शिकायत को स्थानीय स्तर की समस्या माना गया, लेकिन जब रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की गई तो मामला बड़ा होता चला गया. इसके बाद कांग्रेस ने व्यवस्थित तरीके से पूरे विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की पड़ताल शुरू की.

एक वीडियो ने खोली कथित गड़बड़ियों की परत

कुमुद गंगवार के मुताबिक, 13 अक्टूबर को एक व्यक्ति अपने EPIC नंबर की मदद से वोटर आईडी कार्ड निकलवाने पहुंचा था. जब उसके सामने वोटर कार्ड आया तो वह हैरान रह गया. कार्ड में दर्ज नाम और पिता का नाम उसके वास्तविक विवरण से अलग था. सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उसी EPIC नंबर पर 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उसका नाम और विवरण सही दर्ज था. कथित बदलाव सामने आने पर उस व्यक्ति ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया. बाद में यही वीडियो पूरी जांच का आधार बना.

शुरुआती जांच के बाद बनाई गई 53 सदस्यों की टीम

वीडियो सामने आने और कुछ अन्य मामलों की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस ने व्यापक सत्यापन अभियान शुरू किया. कुमुद गंगवार के अनुसार, शुरुआती स्तर पर कई समान प्रकार की विसंगतियां दिखने लगीं, जिसके बाद 53 लोगों की विशेष टीम गठित की गई. इस टीम ने लगातार 96 घंटे तक काम किया. जांच के दौरान पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के सभी 419 मतदान केंद्रों की मतदाता सूची खंगाली गई. कुल 3 लाख 48 हजार 937 मतदाताओं के EPIC नंबरों का मिलान और सत्यापन किया गया.

16,554 मतदाताओं से जुड़ी तीन तरह की गड़बड़ियों का दावा

कांग्रेस का कहना है कि पूरी जांच के दौरान कुल 16,554 मतदाताओं से संबंधित तीन अलग-अलग प्रकार की कथित अनियमितताएं सामने आईं. पहली और सबसे बड़ी श्रेणी 13,150 वोटरों की बताई जा रही है. आरोप है कि इन मतदाताओं के EPIC नंबर और मतदाता सूची में उनकी क्रम संख्या पहले जैसी ही रही, लेकिन नाम और पिता के नाम में बदलाव कर दिया गया. कांग्रेस का दावा है कि इस श्रेणी के सभी प्रभावित मतदाता मुस्लिम समुदाय से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि पार्टी इस मामले को बेहद गंभीर बता रही है.

804 नाम हटाने और 2,600 नए नाम जोड़ने का भी आरोप

कांग्रेस की जांच में दूसरी श्रेणी उन 804 मतदाताओं की बताई गई है जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिए गए. तीसरी श्रेणी में करीब 2,600 नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का दावा किया गया है. पार्टी का कहना है कि इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े होते हैं. कांग्रेस का आरोप है कि जुलाई से सितंबर 2026 के बीच मतदाता रिकॉर्ड में व्यापक स्तर पर बदलाव हुए, जबकि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में इन लोगों की जानकारी सही दर्ज थी.

रिकॉर्ड में दर्ज समय ने बढ़ाए सवाल

कुमुद गंगवार का दावा है कि कुछ मामलों में रिकॉर्ड के भीतर बदलाव का समय भी दिखाई दिया. उनके अनुसार, कुछ प्रविष्टियों में 2 सितंबर 2026 की रात 9 बजकर 26 मिनट पर संशोधन दर्ज होने का विवरण मिला. इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि संबंधित मतदाताओं की जानकारी और अनुमति के बिना उनके नाम तथा पिता के नाम में परिवर्तन कैसे हो गया. कांग्रेस का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में बदलाव बिना उचित प्रक्रिया के संभव नहीं होने चाहिए.

600 से ज्यादा लोगों के शपथपत्र का दावा

कांग्रेस नेता का कहना है कि 600 से अधिक प्रभावित मतदाताओं ने शपथपत्र देकर बताया है कि उन्होंने अपने नाम या अन्य व्यक्तिगत विवरण बदलवाने के लिए फॉर्म-8 जमा नहीं किया था. इतना ही नहीं, जिन लोगों के नाम सूची से हटे बताए जा रहे हैं, उनमें से कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने फॉर्म-7 भरकर अपना नाम हटाने का अनुरोध कभी नहीं किया. इससे विवाद और गहरा हो गया है.

मोबाइल नंबर और OTP प्रक्रिया पर भी सवाल

कांग्रेस ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड को लेकर भी कई प्रश्न उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि कुछ मतदाताओं के ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदले हुए नाम दिखाई दे रहे हैं. कुमुद गंगवार ने पूछा कि अगर नाम बदलने के लिए नियमित प्रक्रिया अपनाई गई थी तो संबंधित आवेदन और उसका रिकॉर्ड कहां है. उन्होंने यह दावा भी किया कि कुछ मामलों में EPIC नंबर से जुड़े मोबाइल नंबरों में भी बदलाव दिखा. उनके मुताबिक, रिकॉर्ड में दिखाई देने वाले मोबाइल नंबरों के अंतिम चार अंक पहले से अलग थे. इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बदलाव के लिए OTP की आवश्यकता होती है तो प्रभावित मतदाताओं के फोन पर कोई संदेश क्यों नहीं पहुंचा.

प्रशासनिक लॉगिन के इस्तेमाल की आशंका

कांग्रेस नेता ने यह भी आशंका जताई कि रिकॉर्ड में बदलाव प्रशासनिक स्तर के लॉगिन के माध्यम से भी किया जा सकता है. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है. पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि 13,150 मतदाताओं के कथित नाम परिवर्तन से जुड़े फॉर्म-8 और अन्य दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं. कांग्रेस का कहना है कि इससे स्पष्ट हो सकेगा कि बदलाव किस आवेदन के आधार पर और किस अधिकारी की मंजूरी से किए गए.

नए नाम जोड़ने और पुराने हटाने पर राजनीतिक सवाल

कुमुद गंगवार का आरोप है कि सूची से हटाए गए 804 मतदाताओं में ज्यादातर लोग ऐसे समुदाय से जुड़े हैं जो भाजपा को वोट नहीं देते. वहीं करीब 2,600 नए नाम ऐसे बूथों पर जोड़ने का आरोप लगाया गया है जहां भाजपा समर्थक मतदाताओं की संख्या अधिक मानी जाती है. उनके अनुसार, कुछ बूथों पर 100 से ज्यादा नए नाम जुड़ने की जानकारी मिली. जबकि बूथ संख्या 57 पर सबसे अधिक 88 नए नाम दर्ज किए जाने का मामला सामने आया.

नए मतदाताओं की जांच में क्या मिला?

कांग्रेस नेता का दावा है कि करीब 2,600 नए जोड़े गए नामों में से 500 लोगों का सत्यापन किया गया. जांच के दौरान ये लोग उन गांवों में नहीं मिले जहां उनका नाम दर्ज बताया गया था. वहीं दूसरी ओर, हटाए गए 804 नामों में से लगभग 25 प्रतिशत लोगों तक पहुंचकर जानकारी जुटाने का दावा किया गया. पार्टी का कहना है कि जिन लोगों के नाम हटे, वे 10 अप्रैल 2026 की अंतिम मतदाता सूची में मौजूद थे और उन्होंने स्वयं नाम हटाने के लिए आवेदन नहीं किया था.

कानूनी मोर्चे पर उतरने की तैयारी

कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा. कुमुद गंगवार ने कहा है कि पार्टी इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई करेगी. उनके मुताबिक तत्कालीन एसडीएम, जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ वर्तमान डीएम को तहरीर दी गई है. अगर पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो कांग्रेस पहले सत्र न्यायालय और उसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि संगठनात्मक स्तर पर ऐसे मामलों की पहचान और जांच के लिए अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा.

चुनाव आयोग का सख्त एक्शन

मामला सार्वजनिक होने के बाद चुनाव आयोग ने भी त्वरित कार्रवाई की है. 21 अक्टूबर की देर रात उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जानकारी दी कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. उन्होंने बताया कि संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और मतदाता पंजीकरण केंद्र के ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से हटा दिया गया है. दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी कहा कि संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

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अब पूरे उत्तर प्रदेश में होगी जांच

इस मामले का असर सिर्फ पीलीभीत तक सीमित नहीं रहा. चुनाव आयोग ने प्रदेश के सभी जिलों में इसी तरह की संभावित गड़बड़ियों की जांच कराने का निर्णय लिया है. सभी जिलों को दो दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं. जांच के दौरान EPIC नंबर, मतदाता का नाम, पिता का नाम और अन्य विवरणों का मिलान किया जाएगा. यानी अब जांच का दायरा पूरे उत्तर प्रदेश तक फैल चुका है. यदि अन्य जिलों में भी इसी तरह की विसंगतियां मिलती हैं, तो यह मामला 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा चुनावी विवाद बन सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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