पंजाब की तीर्थ यात्रा बसों पर NHRC सख्त
NHRC Punjab pilgrimage bus safety: पंजाब में बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को तीर्थ यात्रा कराने के लिए चलाई जा रही बसों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत चलने वाली एसी स्लीपर बसों में कथित सुरक्षा खामियों को गंभीरता से लेते हुए पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है. आयोग ने साफ कहा है कि लोगों की भलाई के लिए शुरू की गई किसी योजना में उनकी जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती.
यह मामला उन बसों से जुड़ा है, जिनमें यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजामों में कमी होने की शिकायत मिली है. आयोग ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव से जवाब मांगा है. दोनों अधिकारियों को सात दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
बसों में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ बसों में बिना जरूरी अनुमति के बदलाव किए गए हैं. ड्राइवर केबिन और यात्रियों के बैठने वाले हिस्से के बीच पार्टीशन और दरवाजे लगाए जाने की बात भी सामने आई है. इसके अलावा, इमरजेंसी एग्जिट और खिड़कियों के रास्ते में रुकावट होने की आशंका जताई गई है.
शिकायत के मुताबिक, बसों में आग का पता लगाने, आग बुझाने और आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने से जुड़े इंतजाम भी पर्याप्त नहीं हो सकते हैं. ऐसे में आग लगने या किसी दूसरे हादसे के दौरान यात्रियों की जान पर खतरा बढ़ सकता है. बुजुर्ग यात्रियों के लिए ऐसी स्थिति और भी मुश्किल हो सकती है.
बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC बेंच ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत यह नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, न कि उन्हें खतरे में डालना. इसलिए यात्रा के दौरान सुरक्षा के तय मानकों का पालन जरूरी है.
आयोग पहले भी बसों में सुरक्षा से जुड़ी खामियों पर चिंता जता चुका है. खास तौर पर ड्राइवर केबिन और यात्री हिस्से के बीच ऐसी बनावट पर सवाल उठे हैं, जो आग लगने पर चेतावनी देने, बातचीत करने और बाहर निकलने में बाधा बन सकती है.
नियम तोड़ने वाली बसें हटाने का निर्देश
NHRC ने पंजाब के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि योजना के तहत चल रही सभी बसों का तुरंत और सही तरीके से निरीक्षण कराया जाए. अगर कोई बस जरूरी सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे तब तक सेवा से हटाया जाए, जब तक खामियां दूर न हो जाएं और सक्षम अधिकारी नियमों के पालन की पुष्टि न कर दें.
रिपोर्ट में बसों की कुल संख्या, निरीक्षण की स्थिति, मिली खामियों और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी. नियम तोड़ने वाली बसों को हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों व ऑपरेटरों की जवाबदेही का ब्योरा भी देना होगा.
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सड़क परिवहन मंत्रालय भी करेगा जांच
केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को बसों के डिजाइन से जुड़े मानकों, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट (CIRT) के दिशानिर्देशों के पालन की समीक्षा करने को कहा गया है.
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियम महज औपचारिकता नहीं हैं. तय समय में ठोस रिपोर्ट नहीं देने या निर्देशों का पालन करने में लापरवाही बरतने पर मामले को गंभीरता से लिया जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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