India Brazil Relations: ब्राजील के राष्ट्रपति पद पर लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा की चौथी बार हुई ऐतिहासिक जीत से दक्षिण अमेरिका की राजनीति में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. भारत के लिए यह परिणाम रणनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है.
लूला के सत्ता में लौटने से भारत-ब्राजील के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूती मिलेगी, जिससे 20 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी. साथ ही, ब्रिक्स मंच और ‘ग्लोबल साउथ’ के मुद्दों पर दोनों देशों का साझा सहयोग वैश्विक राजनीति में और अधिक प्रभावी साबित होगा.
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला की जीत से भारत पर क्या होगा असर?
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने एक बेहद कड़े मुकाबले वाले चुनाव में जीत हासिल कर चौथी बार देश की कमान संभाल ली है. हालांकि यह ब्राजील का अंदरूनी राजनीतिक मामला है, लेकिन इसके भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव दक्षिण अमेरिका की सीमाओं से कहीं आगे तक महसूस किए जा रहे हैं. भारत के लिए लूला की यह जीत बेहद अहम है, क्योंकि यह दोनों देशों के पुराने और घनिष्ठ रिश्तों में निरंतरता बनाए रखती है.
रणनीतिक स्वायत्तता और विदेश नीति का संतुलन
लैटिन अमेरिका में राजनीतिक बदलावों के बीच लूला के फिर से चुने जाने से ब्राजील की पारंपरिक ‘रणनीतिक स्वायत्तता’, ‘बहुपक्षवाद’ और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग की स्वतंत्र नीति कायम रहेगी. भारत ने भी अपनी विदेश नीति में इसी तरह का संतुलन साधा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2026 में लूला की भारत यात्रा के दौरान कहा था कि जब भारत और ब्राजील मिलकर काम करते हैं, तो ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज और अधिक मजबूत होती है.
20 अरब डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य की ओर तेजी
दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध इस साझेदारी की रीढ़ हैं. साल 2025 में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 15.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया था और 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही यह 8.77 अरब डॉलर हो गया. जुलाई 2025 में तय किए गए आगामी पांच वर्षों में 20 अरब डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने की राह अब लूला की वापसी से और आसान होती दिखती है. भारत मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद और दवाएं भेजता है, जबकि ब्राजील से कच्चा तेल और चीनी आयात करता है.
ब्रिक्स और वैश्विक शासन में सुधार की मांग
लूला का चुना जाना ब्रिक्स समूह के भविष्य के लिए भी दूरगामी परिणाम रखता है. भारत और ब्राजील दोनों ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में तत्काल सुधारों के पक्षधर हैं. इसके अलावा, लूला ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रियल) के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है, जिससे भुगतान प्रणाली आसान हो सकती है.
ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिज सहयोग
फरवरी 2026 की यात्रा के दौरान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ मृदा तत्वों और फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों में अहम समझौते हुए थे. भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग और हरित ऊर्जा में ब्राजील की तकनीकों का लाभ उठा सकता है. लूला की वापसी भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर एक अत्यंत सकारात्मक कदम है.
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-भारत एक्सप्रेस
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