नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में शनिवार को आध्यात्मिकता, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला. अखिल विश्व गायत्री परिवार के तीन दिवसीय जन्मशताब्दी महोत्सव की शुरुआत पूरे उत्साह और धार्मिक वातावरण के बीच हुई. इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. वैदिक मंत्रों की गूंज, ध्वजारोहण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच महोत्सव का आगाज हुआ.
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया विशेष रूप से मौजूद रहे. दोनों अतिथियों ने अपने संबोधन में संस्कारों के महत्व, नारी सम्मान, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर विचार रखे.
महोत्सव के पहले दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष और कार्यक्रम के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा के साथ मिलकर ध्वजारोहण किया. इस दौरान शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया. पूरे परिसर में आध्यात्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ आयोजन में भागीदारी की.
माताजी की स्मृति में जारी हुआ विशेष डाक टिकट
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वंदनीया माताजी की जन्मशताब्दी के अवसर पर विशेष डाक टिकट का अनावरण किया. गायत्री परिवार के लिए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
यह डाक टिकट संगठन की 100 वर्षों की साधना, सेवा, तप और समाज कल्याण के लिए किए गए प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का प्रतीक है. इससे पहले वर्ष 1991 में युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के सम्मान में और 2021 में शांतिकुंज की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर भी डाक टिकट जारी किया जा चुका है. माताजी की स्मृति में जारी यह तीसरा डाक टिकट है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री परिवार केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र के निर्माण के लिए लगातार काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि अखंड दीप की शताब्दी का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक ज्ञान, अच्छे संस्कार और सकारात्मक विचारों का प्रकाश पहुंचाना है.
वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उपस्थित लोगों को तीन महत्वपूर्ण संकल्प दिलाए. इनमें मातृत्व और भाईचारे की भावना को मजबूत करना, महिलाओं का सम्मान बढ़ाना और भारतीय संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना शामिल रहा. उन्होंने युवाओं और नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया.
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम
कार्यक्रम के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने महोत्सव को एक ऐतिहासिक अवसर बताया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन वंदनीया माताजी की जन्मशताब्दी, युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की तप-साधना और अखंड दीप के 100 वर्ष पूरे होने का अनूठा संगम है. उनके अनुसार, इन तीनों उपलब्धियों का एक साथ स्मरण करना अपने आप में विशेष महत्व रखता है.
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए शासन की व्यवस्था और धर्म की नैतिक चेतना के बीच बेहतर तालमेल होना जरूरी है. जब व्यवस्था की शक्ति के साथ नैतिक मूल्यों का मेल होता है, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव की राह मजबूत होती है.
विद्यार्थियों ने संभाली व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी
इस बड़े आयोजन को सफल बनाने में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भी अहम भूमिका रही. विश्वविद्यालय के करीब 650 विद्यार्थी अलग-अलग व्यवस्थाओं में सेवाएं दे रहे हैं. कार्यक्रम के दौरान प्रज्ञा योग और विभिन्न राज्यों के लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा. इन प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली.
गौरतलब है कि हरिद्वार में आयोजन के पहले चरण के बाद अब दिल्ली में जन्मशताब्दी महोत्सव का दूसरा चरण आयोजित किया जा रहा है. दो नवंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संकल्पों पर चर्चा की जा रही है.
महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नारी जागरण, विश्व बंधुत्व और युग निर्माण के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना है. पहले दिन आयोजित समारोह में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मनसुख मांडविया, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा, महाराष्ट्र के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार समेत कई राज्यों के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे.
-भारत एक्सप्रेस
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