Priti Adani on PM Modi Varanasi: सनातन संस्कृति की शाश्वत राजधानी काशी के गंगा घाटों पर आयोजित ‘द वर्ल्ड सिम्पोजियम ऑन एंशिएंट विजडम फॉर मॉडर्न चैलेंजेज’ के अंतरराष्ट्रीय मंच से अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और वाराणसी के वैश्विक कायाकल्प की भूरि-भूरि प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण ने काशी के प्राचीन वैभव को आधुनिक दुनिया के साथ इस तरह जोड़ा है कि आज यह पवित्र नगरी भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख और सांस्कृतिक कूटनीति का सबसे सशक्त केंद्र बन चुकी है.
डॉ. प्रीति अदाणी ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही काशी के आध्यात्मिक वातावरण और गंगा की अविरल धारा के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की. उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब इस आध्यात्मिक नगरी को अपना संसदीय क्षेत्र चुना, तब से काशी केवल देश ही नहीं बल्कि समूचे विश्व के आकर्षण का केंद्र बन गई है.
वैश्विक नेताओं की मेजबानी को किया याद
संस्कृतियों का वैश्विक संगम: डॉ. अदाणी ने कहा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस पवित्र नगरी को अपना संसदीय क्षेत्र चुना. उनके दूरदर्शी नेतृत्व में वाराणसी विभिन्न संस्कृतियों के संगम और भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति का प्रतीक बन गया है.”
शिंजो आबे और गंगा आरती: उन्होंने याद दिलाया कि कैसे जापान के दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने काशी के दशाश्वमेध घाट पर बैठकर वैदिक मंत्रोच्चार और पावन गंगा आरती का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया था.
इमैनुएल मैक्रों की ऐतिहासिक नौका यात्रा: उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के काशी दौरे का भी उल्लेख किया, जब प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने गंगा की लहरों पर नौका विहार करते हुए बनारस के ऐतिहासिक घाटों की भव्यता को निहारा था.
प्राचीन से आधुनिक का सेतु: डॉ. अदाणी ने स्पष्ट किया कि ये ऐतिहासिक क्षण दुनिया को यह याद दिलाते हैं कि हमारी प्राचीन परंपराएं और ज्ञान केवल अतीत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे 21वीं सदी के आधुनिक समाज से सीधे संवाद करने में पूरी तरह सक्षम हैं.
पीएम मोदी के सांस्कृतिक विजन का असर
डॉ. प्रीति अदाणी ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान को पहचान दिलाने के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का सबसे बड़ा उदाहरण ‘योग’ है, जिसे आज पूरी दुनिया ने मानसिक और शारीरिक संतुलन के लिए स्वीकार किया है.
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आगे उन्होंने कहा कि कभी हमारे पारंपरिक भोजन का प्रमुख हिस्सा रहे मोटे अनाज (मिलेट्स) आज वैश्विक मंचों पर पोषण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और खाद्य सुरक्षा की चर्चाओं के केंद्र में आ चुके हैं. महा उपनिषद के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ (समूचा विश्व एक परिवार है) के जिस विचार को भारत ने दुनिया के सामने रखा है, वही विचार आज संघर्षों और असमानता से जूझ रही मानवता को सही दिशा दे सकता है.
‘ज्ञान शक्ति देता है, विवेक दिशा दिखाता है’
अपने संबोधन को समेटते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि आज जब दुनिया के पास असाधारण तकनीक और संसाधन उपलब्ध हैं, तब भी युद्ध, अशांति और पर्यावरण संकट बने हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह काशी अपनी जड़ों को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास की ओर बढ़ रही है, वही संतुलन आज हर क्षेत्र में जरूरी है. उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान हमें दुनिया बदलने की ताकत देता है, लेकिन प्राचीन विवेक ही यह सुनिश्चित करता है कि हम दुनिया को बेहतरी की दिशा में बदलें.
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