दिल्ली एनसीआर में ग्रीन पटाखे जलाने की सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इसकी बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने आदेश के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग अब 7 और 8 नवंबर को आतिशबाजी कर सकेंगे. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की यह आदेश दिया है.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक 7 और 8 नवंबर नवंबर 2026 को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे. अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शिक्षण संस्थानों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर प्रतिबंध रहेगा. इन क्षेत्रों में नो क्रैकर जोन घोषित किया जाएगा.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित और PESO द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखों का ही निर्माण किया सकेगा. इनका निर्माण 2 से 6 नवंबर तक रहेगा. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक रहेगी.
कोर्ट ने कहा प्रत्येक पैकेट पर उत्पाद और बैच के अनुसार QR कोड अनिवार्य होगा, जिससे निर्माता, पंजीकरण और परीक्षण प्रमाणपत्र की जानकारी मिल सकेगी. बेरियम युक्त पटाखों, लड़ियों और पारंपरिक पटाखों की बिक्री एवं इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा. इसका उल्लंघन करने पर निर्माताओं और कारोबारियों के लाइसेंस रद्द करने का निर्देश दिया है.
प्रदूषण पर कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
इसके अलावे कोर्ट ने सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को 2 से 30 नवंबर तक वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. साथ ही दीपावली के बाद अस्पतालों में प्रदूषण से संबंधित मरीजों की संख्या और संभावित मौतों के आकंड़ों को जुटाने को कहा है. कोर्ट ने 14 दिसंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट 16 दिसंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जागरूकता फैलाने के लिए क्रिकेटर विराट कोहली जैसे सेलिब्रिटी का मदद क्यों नही लिया जा रहा है. कोर्ट ने साफ कहा था कि लोगों की भावनाओं को ठेस पहुचाना उसका मकसद नहीं है. साथ ही कोर्ट ने पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए नियमों पर सख्ती से अमल की जरूरत बताई.
कोर्ट ने कहा था कि दीवाली का त्योहार सकारात्मक माहौल बनाता है. ऐसे में जरूरी है कि त्योहार के दौरान नियमों का पालन कराया जाए और प्रदूषण पर भी काबू रखा जाए.
सीएसआईआर और नीरी के फॉर्मूले के अनुसार इनमें प्रारंपरिक पटाखों की तुलना में 30 फीसदी कम उत्सर्जन होता है. लेकिन फिर भी इनसे काफी मात्रा में प्रदूषण निकलता है, जिसका पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है.
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