बांग्लादेश में मजदूरों का उबाल
Bangladesh Protest: बांग्लादेश में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं. करीब 28 महीने बाद देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. हालांकि इस बार मामला सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक आंदोलन का नहीं है. सड़कों पर उतरे लोग गारमेंट सेक्टर के मजदूर हैं, जो वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. इससे पहले जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था.
मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन
कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों का कहना है कि मौजूदा वेतन में घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. इसी मांग को लेकर वे लगातार विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी सड़कें रोक रहे हैं, फैक्ट्रियों में काम बंद करा रहे हैं और कई जगहों पर हालात टकराव तक पहुंच गए हैं. विरोध के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं.
31 अक्टूबर से शुरू हुआ आंदोलन
श्रमिकों का यह आंदोलन 31 अक्टूबर से शुरू हुआ. विरोध प्रदर्शन के तहत ढाका के मिरपुर, आशुलिया, सावर और गाजीपुर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क जाम कर दी गईं. कई गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ. हड़ताल और विरोध के कारण लगभग 529 कारखानों पर असर पड़ा, जबकि करीब 10 लाख मजदूर इस स्थिति से प्रभावित हुए.
आगजनी और झड़पों से बढ़ी चिंता
प्रदर्शन के दौरान कई इलाकों में तनाव काफी बढ़ गया. कुछ स्थानों पर पुलिस चौकियों और वाहनों को निशाना बनाए जाने की खबरें आईं. तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी. हालात काबू में लाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. कुछ संवेदनशील इलाकों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की भी तैनाती की गई.
सोमवार को भी नहीं लौटे सामान्य हालात
उम्मीद की जा रही थी कि सोमवार से औद्योगिक गतिविधियां दोबारा पटरी पर लौट आएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सप्ताह की शुरुआत में भी बड़ी संख्या में मजदूर सड़कों पर दिखाई दिए. राजधानी ढाका के मिरपुर इलाके में कई स्थानों पर प्रदर्शन जारी रहा और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही.
मिरपुर में पुलिस और मजदूर आमने-सामने
बांग्लादेश के अंग्रेजी समाचार पत्र प्रथम आलो के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10:45 बजे मिरपुर-10 के सेनपारा परबटा क्षेत्र में कुछ मजदूर गलियों से निकलकर मुख्य सड़क की ओर बढ़ने लगे. पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की और भीड़ को हटाने के उद्देश्य से आंसू गैस के कई गोले छोड़े.
प्रोशिका चौराहे पर भी बढ़ा तनाव
इसके बाद मिरपुर-2 इलाके में स्टेडियम के समीप स्थित प्रोशिका चौराहे पर भी मजदूरों ने सड़क पर उतरने की कोशिश की. प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उन्हें वहां से हटाया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई श्रमिक रूपनगर क्षेत्र से छोटे-छोटे समूहों में निकलकर मिरपुर-2 और प्रोशिका की दिशा में बढ़ रहे थे.
मेट्रो सेवाओं पर भी पड़ा असर
लगातार जारी विरोध प्रदर्शन का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी देखने को मिला. मिरपुर क्षेत्र में मेट्रो सेवाएं प्रभावित हुईं. कई इलाकों में लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही.
12 हजार टका में नहीं चल रहा परिवार
मजदूर संगठनों की प्रमुख मांग न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30 हजार टका करना है. वर्तमान में उन्हें लगभग 12 हजार टका वेतन मिलता है. श्रमिकों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि खाने-पीने का खर्च, किराया, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है. ऐसे में मौजूदा वेतन के साथ परिवार का गुजारा करना कठिन हो गया है.
सरकार ने आवामी लीग पर लगाया आरोप
सरकार का दावा है कि गारमेंट सेक्टर में जारी अशांति के पीछे कुछ राजनीतिक ताकतें सक्रिय हैं. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने 2 नवंबर को आरोप लगाया कि आवामी लीग से जुड़े कुछ उद्योगपति, पूर्व सांसद, मंत्री और राज्य मंत्री हालात बिगाड़ने में भूमिका निभा रहे हैं.
हाईवे जाम और हिंसा भड़काने का दावा
गृह मंत्री का कहना है कि अपदस्थ सरकार के समर्थक मजदूरों को प्रभावित कर सड़क जाम, आगजनी और हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रशासन के पास इससे जुड़े वीडियो और ऑडियो सबूत मौजूद हैं. उनके अनुसार, कुछ फैक्ट्री मालिकों ने जानबूझकर अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर हालात को और जटिल बनाने की कोशिश की.
529 फैक्ट्रियों में असर, वेतन बोर्ड का गठन
रिपोर्टों के अनुसार मिरपुर, सावर-अशुलिया, गाजीपुर और मैमनसिंह क्षेत्रों में कम से कम 529 गारमेंट फैक्ट्रियों ने अशांति के बीच अवकाश घोषित कर दिया था. सरकार ने अब श्रमिकों की मांगों पर विचार के लिए न्यूनतम वेतन तय करने हेतु वेतन बोर्ड गठित किया है.
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है गारमेंट सेक्टर
गारमेंट उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है. रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र देश के प्रमुख निर्यात उद्योगों में शामिल है और विदेशी मुद्रा अर्जित करने का सबसे बड़ा माध्यम है. यूरोप, अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े बाजारों में बांग्लादेशी कपड़ों की भारी मांग रहती है. यहां टी-शर्ट, शर्ट, जींस, ट्राउजर, जैकेट और अन्य रेडीमेड परिधानों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है.
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निर्यात में बड़ा योगदान, चुनौतियां भी गंभीर
वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र से लगभग 39.35 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल निर्यात का 81 प्रतिशत से अधिक था. बांग्लादेश रेडीमेड गारमेंट निर्यात के मामले में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश माना जाता है. बावजूद इसके, कम मजदूरी, कार्यस्थल की परिस्थितियां, वेतन वृद्धि की मांग और समय-समय पर होने वाली हड़तालें इस उद्योग के सामने बड़ी चुनौतियों के रूप में बनी हुई हैं.
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