हवाई यात्रा की बेतहाशा वृद्धि पर लगाम लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से दी गई दलीलों के बाद कहा कि हवाई यात्रा मत कीजिए. चलिए आगे बढिये अगला केस. यह टिप्पणी जस्टिस विक्रमनाथ ने की है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि विमान का किराया 700 फीसदी तक बढ़ गया है. यह एक जरुरी सेवा है और इस तरह किराए में बढ़ोतरी करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है. इन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह टिप्पणी की है.
हवाई किराये पर कंपनियों को मिली बड़ी राहत
बता दें कि केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम 2026 का गजेट जारी करते हुए कहा है कि किराया निर्धारित करने के लिए कंपनियों को छूट होगी, लेकिन अपरिहार्य स्थिति में सरकार निर्देश जारी कर सकती है. ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले हैं. इस नियम के मुताबिक किराया बढ़ाने के लिए एयरलाइंस को सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी. बल्कि टिकट के दाम निर्धारित करने की उन्हें छूट होगी.
हालांकि सरकार केवल तब हस्तक्षेप करेगी जब कोई असाधारण स्थिति पैदा हो और जनहित में ऐसा करना बेहद आवश्यक है. सरकार ने.स्पष्ट किया है कि वे एयरलाइनों पर एक मजबूत निगरानी ढांचा बनाए रखेंगे, ताकि पीक सीजन या आपात स्थितियों में यात्रियों से मनमाना किराया न वसूला जा सके. हालांकि इससे संबंधित एक अन्य याचिका एस लक्ष्मीनारायण ने एल्गोरिदम-आधारित डायनामिक प्राइसिंग और अन्य शुल्कों के खिलाफ दायर कर रखा है.
इसपर कोर्ट सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है. 30 अक्टूबर को दायर इस अर्जी में त्योहारों के दौरान हवाई किराए को सीमित करने और इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक इन बैगेज की सीमा को वापस 25 किलोग्राम करने के लिए अंतरिम निर्देश मांगे गए.
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