आंध्र प्रदेश में लगातार दो चक्रवातों ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. एक चक्रवात का असर खत्म भी नहीं हुआ था कि दूसरे ने राज्य के कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दीं. भारी बारिश और तेज हवाओं के चलते किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. इसके अलावा सड़कों, बिजली व्यवस्था और सरकारी ढांचे को भी काफी क्षति पहुंची है. राज्य में बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बातचीत की और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली.
पीएम मोदी ने राहत कार्यों की सराहना की
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात अर्नब और मुरासु के कारण हुए नुकसान का पूरा ब्यौरा दिया. उन्होंने बताया कि कई जिलों में लगातार खराब मौसम के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, जबकि तेज हवाओं और बारिश ने सड़क और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है.
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राज्य को जल्द से जल्द जरूरी आर्थिक मदद देने की अपील की. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की तारीफ की. उन्होंने मुश्किल हालात में लगातार सतर्क रहने और चक्रवात से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करने के लिए मुख्यमंत्री नायडू की सराहना भी की.
अमित शाह से भी मदद की मांग कर चुके हैं मुख्यमंत्री
इससे पहले मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य के लिए तत्काल आर्थिक सहायता मांगी थी. पत्र में उन्होंने बताया था कि लगातार आए चक्रवातों ने कई जिलों में फसलों के साथ-साथ लोगों की निजी और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने राज्य सरकार की ओर से उठाए गए राहत कदमों की जानकारी देते हुए केंद्र से जल्द वित्तीय सहायता जारी करने का अनुरोध किया था.
अमित शाह ने भी मंगलवार को मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत की थी. इस दौरान उन्होंने चक्रवात मुरासु के प्रभाव, नुकसान की स्थिति और प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जा रही मदद के बारे में जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि राज्य अभी पहले चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान से पूरी तरह संभल भी नहीं पाया था कि मुरासु ने हालात और बिगाड़ दिए.
आठ सरकारी विभागों को 343.95 करोड़ रुपये का नुकसान
मुख्यमंत्री नायडू के मुताबिक, चक्रवात मुरासु से राज्य के आठ सरकारी विभागों को शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब 343.95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र का है. कुल नुकसान का लगभग 94 प्रतिशत यानी 324.22 करोड़ रुपये कृषि से जुड़ा बताया गया है.
प्रभावित जिलों में सात जिलों के 465 गांव शामिल हैं. यहां करीब 50,473 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें खराब हुई हैं. इस प्राकृतिक आपदा से लगभग 69,828 किसान प्रभावित हुए हैं. इनमें धान की खेती को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. करीब 45,900 हेक्टेयर में लगी धान की फसल बारिश और तेज हवाओं की चपेट में आई है.
बापटला, कृष्णा और गुंटूर जिलों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है. इन इलाकों में धान के अलावा बागवानी से जुड़ी फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है. इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका है.
480 स्कूल बने राहत केंद्र, 12 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित निकाले गए
चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, रियल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी और आपातकालीन संचालन केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया था, ताकि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई हो.
राहत और बचाव के लिए 11 एसडीआरएफ और 13 एनडीआरएफ टीमों को तैयार रखा गया था. प्रभावित जिलों में 480 स्कूलों को अस्थायी राहत केंद्रों में बदला गया, जहां जरूरतमंद लोगों के रहने की व्यवस्था की गई. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 12,230 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है.
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