लॉ (कानून) की पढ़ाई का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है. बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने 3 साल और 5 साल के लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र सीमा (Age Limit) के नियम को पूरी तरह से वापस ले लिया है. अब निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करने वाला कोई भी उम्मीदवार बिना किसी उम्र की बाध्यता के लॉ कोर्स में प्रवेश ले सकेगा.
यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में बीसीआई का पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान बीसीआई की ओर से पेश एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड राधिका गौतम ने अदालत को बताया कि बार काउंसिल ने उम्र संबंधी प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को निष्प्रभावी (Infructuous) मानते हुए दायर याचिका का निपटारा कर दिया.
किसने दायर की थी याचिका?
यह याचिका ऋषभ दुग्गल द्वारा दाखिल की गई थी. इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 2016 के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिए ‘लीगल एजुकेशन रूल्स 2008’ के शेड्यूल-3 के नियम-11 में क्लॉज-28 को दोबारा लागू किया गया था. इस प्रावधान के तहत 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र 20 साल निर्धारित की गई थी (जिसे बीसीआई ने 2013 में हटाया था और फिर 2016 में दोबारा लागू कर दिया था).
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता के वकील जोहेब हुसैन ने तर्क दिया था कि उम्र की सीमा तय करने वाला बीसीआई का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. याचिका में यह भी कहा गया था कि जब वकालत (Advocacy) में पंजीकरण के लिए उम्र संबंधी प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट पहले ही असंवैधानिक ठहरा चुका है, तो लॉ की पढ़ाई में दाखिले के लिए उम्र की सीमा तय करना उससे भी अधिक अनुचित प्रतिबंध है. इसके अलावा, अलग-अलग हाईकोर्ट के फैसलों में विरोधाभास के चलते देश भर में एक समान व्यवस्था की मांग की गई थी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अनुरोध किया कि बीसीआई के प्रस्ताव में इस बात को शामिल किया जाए कि जनरल काउंसिल का यह फैसला सोच-समझकर और अंतिम है, क्योंकि बीसीआई पहले भी उम्र सीमा हटाने के बाद उसे दोबारा लागू कर चुका था. इस पर बीसीआई के वकील ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव हाल ही में पारित हुआ है.
उम्र सीमा हटाने के पीछे बीसीआई का तर्क
बीसीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, लीगल एजुकेशन कमेटी के सह-अध्यक्ष और दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन के तर्कपूर्ण आदेश और लीगल एजुकेशन की स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों के बाद उम्र की सीमा हटाने का यह कदम उठाया गया है.
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बीसीआई की जनरल काउंसिल ने स्वतंत्र रूप से विचार करने के बाद माना कि लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की पूर्ण पाबंदी लगाने का कोई पर्याप्त शैक्षणिक आधार नहीं है. शैक्षणिक योग्यता, अनिवार्य उपस्थिति, पढ़ाई के घंटे, परीक्षाएं और प्रोफेशनल ट्रेनिंग जैसी मौजूदा व्यवस्थाएं कानूनी शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए पूरी तरह पर्याप्त हैं. केवल उम्र के आधार पर योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों को कानून की पढ़ाई से वंचित करना बिल्कुल उचित नहीं है.
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