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‘कन्यादान’ की जगह ‘वरदान’: दुल्हन लेकर पहुंची बारात, फूट-फूटकर रोया दूल्हा; देखें सरगुजा का वीडियो

Sarguja Unique Wedding: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में एक अनोखी शादी हुई, जहां दुल्हन देवमुनि एक्का बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची. शादी में ‘कन्यादान’ की जगह ‘वरदान’ हुआ और दूल्हे की विदाई हुई. जानें इस अनोखी परंपरा की पूरी कहानी.

Sarguja Unique Wedding

Sarguja Unique Wedding: सरगुजा/दिनेश गुप्ता: शादी-ब्याह को लेकर हमारे समाज में सदियों से एक ही तस्वीर बनी हुई है. सजा-धजा दूल्हा बारात लेकर आता है, फेरे होते हैं और आखिर में दुल्हन रोते हुए अपने मायके से विदा होकर ससुराल चली जाती है. लेकिन, छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले से एक ऐसी अनोखी शादी सामने आई है, जिसने इस पूरी रवायत को ही उल्टा कर दिया है. यहां बारात भी दुल्हन लेकर आई, रस्में भी उलटी हुईं और जब विदाई की बारी आई, तो अपना घर और परिवार छोड़ते वक्त दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा फूट-फूटकर रो पड़ा.

‘कन्यादान’ नहीं शादी में हुआ ‘वरदान’ (Sarguja Unique Wedding Story)

यह अनोखी शादी सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में हुई. दुल्हन देवमुनि एक्का अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ गाजे-बाजे की बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुंची. शादी मसीही (ईसाई) रीति-रिवाजों और स्थानीय आदिवासी परंपराओं के मेल से संपन्न हुई. इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें ‘कन्यादान’ की रस्म नहीं निभाई गई, बल्कि लड़के वालों की तरफ से ‘वरदान’ किया गया. दूल्हा पक्ष ने दुल्हन के हाथों में अपने बेटे का हाथ सौंप दिया.

जब फूट-फूटकर रोने लगा दूल्हा (Sarguja Unique Wedding Video)

शादी की रस्में पूरी होने के बाद जब विदाई का वक्त आया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया. जिस तरह एक बेटी अपना घर छोड़ते वक्त रोती है, ठीक उसी तरह दूल्हा बिलासुस अपने माता-पिता और परिजनों से गले मिलकर फूट-फूटकर रोने लगा. दूल्हे के आंसू देखकर वहां मौजूद मेहमानों की आंखें भी नम हो गईं. इसके बाद दुल्हन देवमुनि अपने दूल्हे को विदा कराकर हमेशा के लिए अपने घर (पैगा) ले गई.

 

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आखिर क्यों निभाई गई उल्टी रवायत? (Sarguja Unique Wedding Viral)

इस अनोखी शादी के पीछे एक बेहद भावुक और व्यावहारिक कारण छिपा है. दरअसल, दुल्हन देवमुनि के पिता मोहन एक्का पेशे से एक किसान हैं. उनके परिवार में चार बेटियां हैं, लेकिन कोई बेटा नहीं है. खेती-किसानी और बुढ़ापे के सहारे के लिए पिता की चाहत थी कि वे अपनी बेटी की शादी ऐसे लड़के से करें, जो दामाद नहीं बल्कि ‘बेटा’ बनकर उनके घर में रहे. जब उन्होंने बरवा परिवार के सामने यह प्रस्ताव रखा, तो वे खुशी-खुशी राजी हो गए. लड़के पक्ष ने इस नई पहल को स्वीकार करते हुए समाज के सामने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया.

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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

इस शादी का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, यह तेजी से वायरल हो गया. लोग इसे “नया भारत” और “परंपराओं को चुनौती” जैसे टैग्स के साथ शेयर कर रहे हैं. हालांकि, स्थानीय जानकारों का कहना है कि सरगुजा के कई आदिवासी समुदायों में लड़कियों का बारात लेकर जाना कोई नई बात नहीं है, यह उनकी समृद्ध और मातृसत्तात्मक संस्कृति का एक पुराना हिस्सा रहा है.



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