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‘गोल्डन ग्रैंडमा’ 94 साल की एथलीट ने जीता 4 स्वर्ण पदक

राजस्थान (Rajasthan) के बीकानेर की 94 वर्षीय एथलीट पानी देवी गोदारा ने चेन्नई में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़, डिस्कस थ्रो, शॉटपुट और भाला फेंक में चार स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. उन्हें “गोल्डन ग्रैंडमा” कहा जा रहा है. उन्होंने यह साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है और संकल्प व मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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Golden Grandma Bikaner: उम्र सिर्फ एक नंबर है, इसको राजस्थान की बुजुर्ग महिला पानी देवी गोदारा ने सही साबित कर दिया है. उन्होंने 94 साल की उम्र में 4 स्वर्ण पदक जीतकर सिर्फ राजस्थान नहीं, पूरे देश को गौरवान्वित किया है. पानी देवी गोदारा राजस्थान के बीकानेर जिले से आती है. उन्होंने चेन्नई में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में अलग-अलग गेम में चार गोल्ड मेडल जीता है. पानी देवी गोदारा ने ये साबित कर दिया है कि द्दढ़ संकल्प की कोई सिमा नहीं होती और एक बार जो बात मन में ठानली तो उसको करना मुश्किल नहीं होता.

चारों गेम में गोल्ड मेडल

पानी देवी गोदारा ने अपनी शानदार फिटनेस और खेल की क्षमताओं के जरीए चेन्नई में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़, डिस्कस थ्रो, शॉटपुट और भाला फेंक जैस गेम में अपना शीर्ष स्थान पाया. इसके साथ ही उन्होंने चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए. जिसके चलते आज पूरा राजस्थान उन्हें “गोल्डन ग्रैंडमा” के नाम से जान रहा है. इससे पहले, मार्च महीने में पानी देवी गोदारा ने बेंगलुरु में आयोजित 45वीं नेशनल मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट, 100 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीते थे. पानी देवी की इन उपलब्धियों ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है. उनकी उपलब्धियों ने उनकी बढ़ती उम्र के बावजूद गेम के प्रति उनके अटूट उत्साह और समर्पण को भी दर्शाया है.

आज भी भैसों का देखभाल करती है

बीकानेर की चौधरी कॉलोनी की रहने वाली पानी देवी एथलेटिक्स के प्रति अपने जुनून को घर की जिम्मेदारियों के साथ जोड़ती हैं. वह रोजाना अपनी गायों और भैंसों की देखभाल करती हैं और इसके लिए कड़ी मेहनत करती हैं. वह एक सख्त फिटनेस रूटीन का भी पालन करती हैं, जिसने उनकी असाधारण सफलता में योगदान दिया. पानी देवी की जीवनशैली में ही स्पोर्ट्स भरा हुआ है, जिसने उन्हें इन मेडल्स के और करीब लाया है. पानी देवी इस उम्र में होने के बावजूद आज भी इतनी मेहनत और परिश्रम करती हैं, जिसके कारण वो इन सारी खुशियों की हकदार हैं.

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94 साल में इतनी सकारात्मक सोच

इस उम्र में पदक जीतना पानी देवी के लिए एक बड़ी सफलता हो सकती है, लेकिन यह सभी के लिए, खासकर महिलाओं के लिए, एक प्रेरणा भी है. संदेश यह है कि महिलाओं और पुरुषों को फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए. क्योंकि जब 94 साल की बुजुर्ग ये कारनाम कर सकती है तो हमें उम्र का बहाना बनाना सही नहीं होगा.



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