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आखों में आई ड्रॉप की जगह डाल दी कफ सीरप…चली गई रोशनी! MP के सागर में सरकारी अस्पताल ने ये क्या कर डाला?

मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जहां 19 महीने के बच्चे की आंख में कथित तौर पर गलत दवा डाल दी गई. परिजनों का दावा है कि इसके बाद बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई, जबकि मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने समिति गठित की है…

MP Sagar Hospital Medical Negligence: अजब मध्य प्रदेश के गजब सरकारी अस्पतालों का एक ऐसा अनोखा और हैरान कर देने वाला कारनामा सामने आया है, जिसे सुनकर किसी का भी दिमाग चकरा जाएगा. आमतौर पर आपने डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करते और उन्हें नई जिंदगी देते देखा होगा. लेकिन सागर जिले की बन्डा तहसील से जो मामला सामने आया है, उसने चिकित्सा जगत को हिलाकर रख दिया है.

यहां के सिविल अस्पताल में एक शिशु रोग विशेषज्ञ ने लापरवाही का ऐसा अनोखा रिकॉर्ड बना दिया, जिसकी कीमत एक 19 महीने के मासूम बच्चे को अपनी आंखों की रोशनी गंवाकर चुकानी पड़ी है. डॉक्टर साहब ने सर्दी-खांसी ठीक करने के फेर में बच्चे की आंख में कफ साफ करने वाली दवा का ड्रॉप डाल दिया.

सर्दी-खांसी का इलाज करने पहुंचे थे डॉक्टर साहब

यह पूरी अजीबोगरीब और दर्दनाक दास्तान (MP Sagar Hospital Medical Negligence) सागर जिले के भूसा कमलपुर गांव की है. यहां रहने वाले इन्द्राज विश्वकर्मा अपने 19 महीने के मासूम बेटे विनय विश्वकर्मा को लेकर बन्डा सिविल अस्पताल पहुंचे थे. बच्चे को हल्की सर्दी, खांसी और आंखों में मामूली लालिमा की शिकायत थी. गरीब पिता ने अस्पताल की पर्ची कटवाई और ड्यूटी पर मौजूद शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हिमांशु वर्मा के केबिन में पहुंचे. डॉक्टर साहब ने बच्चे की जांच की और फिर जो किया, उसकी उम्मीद शायद यमराज ने भी नहीं की होगी.

आंख में डाल दिया कफ साफ करने वाला ड्रॉप

पीड़ित पिता का आरोप है कि डॉक्टर साहब ने पर्चे पर दवाइयां लिखने के साथ ही खुद ही बच्चे की आंखों में एक ड्रॉप डाल दिया. बाद में जब इस मामले का खुलासा हुआ तो पता चला कि वह कोई आई ड्रॉप नहीं था, बल्कि कफ साफ करने वाली दवा थी. गलत दवा आंख में जाते ही मासूम बच्चा तड़पने लगा.

परिजन करीब तीन से चार घंटे तक अस्पताल में ही डॉक्टरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन अस्पताल का स्टाफ इस अजीबोगरीब गलती को छुपाने के लिए मामले को टालता रहा और अंत में बच्चे को जिला अस्पताल रेफर कर दिया.

एम्स के डॉक्टरों ने जब बताया सच

सागर जिला अस्पताल से भी जब बच्चे को आराम नहीं मिला, तो बेबस माता-पिता उसे लेकर सीधे एम्स भोपाल पहुंचे. एम्स के बड़े और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जब बच्चे की आंखों की विस्तृत जांच की, तो वहां की रिपोर्ट देखकर सबके होश उड़ गए.

डॉक्टरों ने बताया कि इस गजब की चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मासूम विनय की आंखों की रोशनी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो चुकी है. एक गलत दवा ने 19 महीने के बच्चे की दुनिया में ऐसा अंधेरा फैलाया कि वह अब कभी कुछ नहीं देख पाएगा.

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थाने पहुंची शिकायत, जांच शुरू

इस सनसनीखेज और अजीब मामले के बाद पीड़ित पिता ने बन्डा थाने में आरोपी डॉक्टर और अस्पताल के गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज कराई है. मामला मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी अपनी लाज बचाने के लिए एक्टिव हो गया है.

सागर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉक्टर गंगा प्रसाद आर्य ने आनन-फानन में तीन सदस्यों की एक जांच कमेटी बना दी है. अब यह कमेटी एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी कि आखिर डॉक्टर साहब ने आंख में कफ सिरप डालने का यह अनोखा कारनामा क्यों और कैसे किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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