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प्रशांत त्यागी, वरिष्ठ संवाददाता दिल्ली




भारत एक्सप्रेस


Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा के पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस के लिए यह राह बेहद कठिन है. 2013 के बाद से नई दिल्ली, कालकाजी और जंगपुरा जैसी प्रमुख सीटों पर कांग्रेस का मतदाता आधार लगातार कमजोर हुआ है.

कांग्रेस के रणनीतिकारों ने तय किया है कि वो भी बीजेपी के साथ ही केजरीवाल के खिलाफ आल आउट अटैक पर जाने को तैयार हैं.

पीएम मोदी दिल्ली में कैंपेन की अगुवाई करते दिख रहे है वहीं केजरीवाल बीजेपी द्वारा किए हर हमले का जवाब दे रही है लेकिन इस सबके बीच कांग्रेस लीडरशिप गायब है.

यह अभियान मूल रूप से 27 दिसंबर 2024 से शुरू होना था, लेकिन 26 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के कारण इसे स्थगित कर दिया गया.

जेपीसी में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें से 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से शामिल होंगे. जेपीसी में लोकसभा से सत्तारूढ़ एनडीए के 14 सदस्य और विपक्ष के 7 सदस्य शामिल हैं.

India Alliance and Congress Leadership: 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद, कांग्रेस इंडिया गठबंधन में असंतोष का सामना कर रही है. विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम और मुद्दों पर मतभेदों ने गठबंधन के भीतर तनाव पैदा किया है.

26 और 27 दिसंबर को बेलगाम में कांग्रेस पार्टी एक ऐतिहासिक आयोजन करने जा रही है. यह कार्यक्रम 1924 में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में हुए कांग्रेस के बेलगाम अधिवेशन की 100वीं वर्षगांठ को समर्पित है.

दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस, जो पिछले दो चुनावों में खाता खोलने में विफल रही थी, इस बार आक्रामक रणनीति अपना कर आगे बढ़ रही है.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई फ्लोर लीडर्स की बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनी, जिससे संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने का रास्ता साफ हुआ है.

साल 2018 में राहुल गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का प्रस्ताव पारित किया था. हालांकि, इस मुद्दे पर पार्टी कभी पूरी तरह मुखर नहीं हुई और यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया.