उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस
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भारत अब ‘सॉफ्ट स्टेट’ नहीं: जॉर्ज सोरोस, हिंडनबर्ग और बीबीसी को सीधा संदेश
पीएम मोदी के गतिशील नेतृत्व के तहत भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन ये दर्शाते हैं यह अब एक 'सॉफ्ट स्टेट' नहीं है बल्कि एक मजबूत, मुखर देश है जो अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए साहसिक कदम उठाने को तैयार है.
आड़े आए पाक के कर्म, भारत कैसे निभाए पड़ोसी धर्म?
भारत तो वैसे भी वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति वाला देश रहा है जिसमें पड़ोसी ही क्या पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का भाव है। सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इस महान परंपरा को कई मौकों पर नया आयाम दिया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का एक साल: संवाद से ही निकलेगा समाधान
भारत ने युद्ध पर शुरू से ही एक तटस्थ रुख रखा है और रूस की कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से निंदा करने से भी परहेज किया है।
हिंडनबर्ग एपिसोड से और मजबूत होकर निकलेंगे गौतम अडानी, जानिए क्यों…
अय्यर उन आलोचकों से असहमत हैं जो इस बात का दावा करते हैं कि अडानी मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर में कारोबार करते हैं, जहां वास्तविक प्रतिभा की तुलना में सरकार की अनुकूलता अधिक महत्वपूर्ण है.
उत्तर प्रदेश रचेगा कीर्तिमान, निवेशकों से मिलेगी नई पहचान
यदि व्यवसायी राज्य में रुचि दिखा रहे हैं, तो इसकी एक और बड़ी वजह ये भी है कि वे पिछले कुछ दशकों की तुलना में खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। स्थिर और सक्षम सरकार की सरपरस्ती में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है।
भारत के खिलाफ अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का नापाक मंसूबा
हेज फंड मैनेजर और शॉर्ट सेलर जॉर्ज सोरोस ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट की तारीफ की, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कमजोर करेगी.
आसमानी उम्मीदों का प्रतीक बना मोदी का भारत
नया भारत बड़े सपने देखने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने का साहस दिखा रहा है। पहले सिर्फ गरीबी, विदेशों से पैसे मांगने और किसी तरह गुजारा करने की चर्चा होती थी। अब दुनिया भर में भारत को लेकर सकारात्मकता है।
Adani पर राहुल गांधी के आरोपों का फैक्ट चेक
हिंडनबर्ग रिपोर्ट में कुछ सवाल उठाए गए हैं, जिस पर वाजिब प्रतिक्रिया जरूरी है. लेकिन, इन गंभीर सवालों को राजनीतिक किचड़ उछालने की कवायद तक सीमित रखना हमारे देश के लिए नुकसानदायक है.
कुदरत के इशारे, समझो तो पार लगाए
हमें इस तरह के भूकंपों से सबक सीखने की जरूरत है। वजह ये है कि भूकंप के लिहाज से भारत भी अत्यंत सक्रिय जोन में है।
फूट न जाए ध्रुवीकरण का ‘गुब्बारा’
अगर चीन ने जानबूझकर नहीं भी चाहा होगा कि उसका गुब्बारा पकड़ा जाए, तो भी उसके लिए इस ‘चूक’ का इससे अच्छा समय कोई दूसरा नहीं हो सकता था।





