उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस
भारत एक्सप्रेस
अडानी मामले पर विपक्ष का दोहरा रवैया
अगर गौतम अडानी इतने ही खराब हैं तो अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, पिनराई विजयन और ममता बनर्जी ने उनके साथ अरबों डॉलर के निवेश की डील क्यों की? राजस्थान में गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है.
अडानी-हिंडनबर्ग की गाथा में सिर्फ अडानी नहीं देश का भविष्य दांव पर
सोचने लायक बात ये भी है कि अगर अडानी समूह अपनी निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं कर पाता है तो क्या होगा? इसका खामियाज़ा भारतीय अर्थव्यवस्था को भुगतना होगा।
बदनसीबी के 76 साल, दो हफ्ते बाद पाकिस्तान कंगाल
संकट की घड़ी में पाकिस्तान की मदद के लिए चीन आगे नहीं आया. अब पाकिस्तान ने भी सीपेक के तहत अपने मुल्क में चल रहे प्रोजेक्ट के लिए चीनी नागरिकों की सुरक्षा से हाथ खड़े कर दिए हैं.
बजट 2023-24 बेहद खास, अर्थव्यवस्था पर मजबूत विश्वास
निर्मला सीतारमन के बजट की एक और खासियत यह है कि राजस्व जुटाने में कॉरपोरेट टैक्स और इनकम टैक्स बराबर का योगदान करने जा रहे हैं।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट से शेयर बाजार में हाहाकार, ‘आपदा’ के लिए हम कितने तैयार?
साख के साथ-साथ हिंडनबर्ग रिसर्च अपनी रिपोर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट अडाणी समूह की प्रमुख कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) से पहले आई है।
बीबीसी डॉक्यूमेंट्री: पीएम मोदी की वैश्विक छवि को धूमिल करने की औपनिवेशिक मानसिकता
राजनीतिक तौर पर प्रधानमंत्री के विरोध का उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन जब वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री पद पर सवाल उठते हैं तो उसका मतलब देश पर सवाल उठना होता है।
अध्यक्ष पद पर जेपी नड्डा को सेवा विस्तार: नया कार्यकाल, बीजेपी का अमृतकाल
बहरहाल नई पारी में जेपी नड्डा ने मिशन 2024 की शुरुआत कर दी है और गाजीपुर से इसका शंखनाद राजनीतिक रूप से विपक्ष के लिए एक बड़ा संदेश है।
‘शरीफ’ नहीं हैं पाकिस्तान के इरादे
शरीफ पर विश्वास करने की कोई वजह भी नहीं है। पाकिस्तान जब तक सीमा पार से आतंकवाद को नहीं रोकता, तब तक भारत को उससे क्यों बात करनी चाहिए?
हादसा नहीं बदलाव का उदाहरण बने जोशीमठ
सवाल उठता है कि विकास के नाम पर हम जो विध्वंस कर रहे हैं, क्या ये त्रासदी वाकई उसी का परिणाम हैं? अगर ये निर्विवाद सच्चाई है तो विकास की कीमत क्या होनी चाहिए?
दांव पर ‘विश्वगुरु’ की साख
जी-20 इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के सभी पांच स्थायी सदस्यों, G-7 के सभी सदस्यों और सभी BRICS देशों का प्रतिनिधित्व करता है।





