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उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस




भारत एक्सप्रेस


अगर गौतम अडानी इतने ही खराब हैं तो अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, पिनराई विजयन और ममता बनर्जी ने उनके साथ अरबों डॉलर के निवेश की डील क्यों की? राजस्थान में गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है.

सोचने लायक बात ये भी है कि अगर अडानी समूह अपनी निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं कर पाता है तो क्या होगा? इसका खामियाज़ा भारतीय अर्थव्यवस्था को भुगतना होगा।

संकट की घड़ी में पाकिस्तान की मदद के लिए चीन आगे नहीं आया. अब पाकिस्तान ने भी सीपेक के तहत अपने मुल्क में चल रहे प्रोजेक्ट के लिए चीनी नागरिकों की सुरक्षा से हाथ खड़े कर दिए हैं.

निर्मला सीतारमन के बजट की एक और खासियत यह है कि राजस्व जुटाने में कॉरपोरेट टैक्स और इनकम टैक्स बराबर का योगदान करने जा रहे हैं।

साख के साथ-साथ हिंडनबर्ग रिसर्च अपनी रिपोर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट अडाणी समूह की प्रमुख कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) से पहले आई है। 

राजनीतिक तौर पर प्रधानमंत्री के विरोध का उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन जब वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री पद पर सवाल उठते हैं तो उसका मतलब देश पर सवाल उठना होता है।

बहरहाल नई पारी में जेपी नड्डा ने मिशन 2024 की शुरुआत कर दी है और गाजीपुर से इसका शंखनाद राजनीतिक रूप से विपक्ष के लिए एक बड़ा संदेश है।

शरीफ पर विश्वास करने की कोई वजह भी नहीं है। पाकिस्तान जब तक सीमा पार से आतंकवाद को नहीं रोकता, तब तक भारत को उससे क्यों बात करनी चाहिए?

सवाल उठता है कि विकास के नाम पर हम जो विध्वंस कर रहे हैं, क्या ये त्रासदी वाकई उसी का परिणाम हैं? अगर ये निर्विवाद सच्चाई है तो विकास की कीमत क्या होनी चाहिए?

जी-20 इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के सभी पांच स्थायी सदस्यों, G-7 के सभी सदस्यों और सभी BRICS देशों का प्रतिनिधित्व करता है।