उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस
भारत एक्सप्रेस
पाकिस्तान का मर्ज, दुनिया का दर्द
पड़ोस में जब इतनी उथल-पुथल मची हो तो भारत भला कैसे निश्चिंत रह सकता है। चीन के साथ जारी संकट के बीच पाकिस्तान में तालिबान का बढ़ता आतंक हमारे लिए दोहरी परेशानी खड़ी कर सकता है।
कंझावला हादसे से महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल: नया साल, पुराना हाल
हमें समझना होगा कि महिला सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई भी समझौता होगा, तो निर्भया, कंझावला जैसे मामलों पर रोक नहीं लग सकेगी।
2024 का इम्तिहान, 2023 में घमासान
कुछ मुद्दे हैं जो मोदी और बीजेपी को परेशान कर सकते हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद बेरोजगारी का उच्चतम स्तर अभी भी केन्द्र सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
आर्थिक मोर्चे पर ‘कुछ बड़ा’ करने का साल
2023 में जो एक चुनौती दिख रही है वो रोजगार के क्षेत्र से आती दिख रही है। हालांकि दुनिया के मुकाबले भारत में बेरोजगारी की स्थिति उतनी भयावह नहीं है लेकिन हालात कोई बहुत अच्छे भी नहीं हैं।
कोरोना की पिक्चर अभी बाकी है !
चीन के लिए हासिल ये है कि एक तरफ मौत का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ आर्थिक विकास दर गिरकर पांच दशकों के न्यूनतम स्तर 2.8 से 3.2 प्रतिशत तक जाती दिख रही है।
जेलेंस्की-बाइडेन का मिलन, अमन की उम्मीद पर ग्रहण?
दुनिया को और खासकर अमेरिका को यह बात समझनी होगी कि यूक्रेन-रूस युद्ध का अंत यूक्रेन के हाथ में नहीं है। नाटो के देश और खुद अमेरिका के साथ बातचीत से ही इस युद्ध का शांतिपूर्ण अंत हो सकता है।
बिहार में शराबबंदी: ‘जिद जहरीली या जाम’?
बिहार की घटना को देश सबक के तौर पर ले सकता है। शराबबंदी को लागू करना जितना जरूरी है, उससे अधिक जरूरी है इसे बेहतर तरीके से लागू करना।
मोदी से जिनपिंग को क्यों लगता है डर?
जाहिर है लगातार मजबूत होता जा रहा भारत चीन की आंखों में चुभता है। भारत खुद एक परमाणु शक्ति है, इसलिए खुले मैदान में तो लाल सेना की हिम्मत नहीं कि वो हिंद के वीरों को चुनौती दे सके।
गुजरात में चमत्कार, 2024 की जमीन तैयार
गुजरात के संदर्भ में आम आदमी पार्टी पर चर्चा तुलनात्मक रूप से ज्यादा प्रासंगिक होगी जो दिल्ली और पंजाब के बाद अब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के राज्य में भी पैर जमाने में कामयाब रही है।
जीत कर भी ‘दिल्ली दूर’!
यह भी मानना होगा कि विधानसभा चुनावों में आगे की कई चाल पहले से सोच कर विपक्षियों को धूल चटाने में माहिर हो चुकी बीजेपी एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी की ‘कल्पनाशीलता’ के सामने कमजोर साबित हुई।





