उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस
भारत एक्सप्रेस
देश के युवाओं और PM मोदी के बीच ब्रिज बना है ‘मन की बात’
केंद्रीय संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि सभी सीबीएसई और केंद्रीय बोर्ड के स्कूलों में कॉमिक किताबों की मुफ्त प्रतियां वितरित की जाएंगी.
हिंदुओं पर हमला – संयोग या साजिश ?
कनाडा का सरकारी आंकड़ा बताता है कि बीते कुछ वर्षों में उनके देश में एंटी-हिंदू नैरेटिव में 72 फीसद की तेजी आई है. माना जा रहा है कि इसकी प्रमुख वजह खालिस्तानी समर्थकों का इस्लामिक कट्टरपंथियों से हाथ मिला लेना है.
वैश्विक आबादी में अव्वल हुआ भारत: अब वक्त हमारा है
अगर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश का तमगा हमें कुछ दशक पहले मिला होता तो हो सकता है ये देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय होता।
मैक्रों के बयान पर बहस: नई दुनिया का उदय
बेशक यूक्रेन युद्ध में कम योगदान के लिए फ्रांस की भूमिका अक्सर सवालों में घिरती रही है, लेकिन यूरोप के ज्यादातर अन्य देश भी अमेरिका को लेकर सहज नहीं हैं।
गहलोत ही राजस्थान के ‘आलाकमान’
तीन साल पहले राजस्थान में बीजेपी के ऑपरेशन लोट्स को विफल करने से पहले भी दूसरे राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बचाने में गहलोत कांग्रेस में चाणक्य की भूमिका निभाते नजर आए हैं।
वंशवाद की राजनीति के खिलाफ पीएम मोदी की जंग
पीएम मोदी ने नौकरशाही और अन्य सरकारी संस्थानों में राजनीतिक परिवारों के प्रभाव को कम करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं.
साकार होगा विपक्षी एकता का ‘चमत्कार’?
वैसे अगर किसी तरह विपक्ष बीजेपी के खिलाफ एकजुट रहने का चमत्कार कर दिखाता है, तो फिर चुनाव दिलचस्प हो सकता है। लेकिन राजनीति में कोई दल अपने हितों की अनदेखी कर गठबंधन नहीं बनाएगा।
फिनलैंड बना नाटो का मेंबर, एक नए युद्ध का डर!
फिनलैंड को नाटो की सदस्यता देने से तमतमाया रूस अपनी सैन्य शक्ति को लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में फिनलैंड के बाद अगर यूक्रेन को भी नाटो की सदस्यता दी गई तो ये रूस को खुली चुनौती होगी जिसका अंजाम महाविनाश हो सकता है।
क्या चीनी बंदरगाहों की तरह भारत में सफलता की कहानी दोहरा सकता है अडानी पोर्ट्स?
अडानी पोर्ट्स की अभूतपूर्व सफलता भारत की आर्थिक उदारीकरण नीतियों की सफलता का प्रतिबिंब है. भारत में अब 7500 किमी लंबी तटरेखा के साथ 12 प्रमुख और 200+ गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं.
2024 की अंगड़ाई कर्नाटक की लड़ाई
जहां तक वोक्कालिगा समुदाय की बात है तो यह कर्नाटक का दूसरा प्रमुख समुदाय है और राज्य की आबादी में इसकी 12 से 14 फीसद के बीच हिस्सेदारी है।





